दुनिया की जिंदगी हमेशा आसान नहीं होती। कभी आर्थिक तंगी, कभी पारिवारिक झगड़े, कभी सेहत की चिंता—परेशानियाँ इंसान की जिंदगी का हिस्सा हैं। लेकिन मोमिन की खूबी यह है कि वह हर मुश्किल में अल्लाह की तरफ रुख करता है और उससे मदद मांगता है।
इस लेख में आप जानेंगे:
- परेशानियाँ क्यों आती हैं
- सबसे असरदार दुआएँ
- कब और कैसे पढ़ें
- सुन्नती तरीके
परेशानी क्यों आती है? — इस्लामी नजरिया
इस्लाम हमें बताता है कि परेशानियाँ 3 वजहों से आती हैं:
1. आज़माइश (Test)
अल्लाह बंदे को आज़माता है कि कौन सब्र करता है।
2. गुनाहों की माफी
मुसीबतें गुनाहों को धो देती हैं।
3. ईमान और यकीन को मजबूत करना
मुश्किलें इंसान को अल्लाह के और करीब कर देती हैं।
कुरआन कहता है:> “हर मुश्किल के साथ आसानी है।” (94:5–6)
परेशानी दूर करने की सबसे असरदार दुआएँ
1. दुआ-ए-यूनुस (सबसे ताक़तवर)
لَّا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ سُبْحَانَكَ إِنِّي كُنْتُ مِنَ الظَّالِمِينَ
Meaning:“तेरे सिवा कोई माबूद नहीं। तू पाक है। मैं ही ज़ालिमों में से था।”
हदीस:
जिसने इस दुआ को किसी भी टेंशन या मुसीबत में पढ़ा, अल्लाह उसे राहत देता है।
2. चिंता और डर दूर करने की दुआ
حَسْبُنَا اللَّهُ وَنِعْمَ الْوَكِيل
Meaning: “अल्लाह हमारे लिए काफी है और वही बेहतर काम बनाने वाला है।”
3. डर, ग़म और बेचैनी खत्म करने की दुआ
اللّٰهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الهَمِّ وَالْحَزَن

Meaning: “ऐ अल्लाह! मैं चिंता और ग़म से तेरी पनाह चाहता हूँ।”
4. रोज़गार और तंगी दूर करने की दुआ
رَبِّ إِنِّي لِمَا أَنزَلْتَ إِلَيَّ مِنْ خَيْرٍ فَقِيرٌ
Meaning: “हे अल्लाह! मैं तेरी हर दी हुई भलाई का मोहताज हूँ।”

कौन-सी परेशानी में कौन-सी दुआ पढ़ें?
परेशानी पढ़ने की दुआ बड़ी मुसीबत में दुआ-ए-यूनुसडर
और तनाव में ये पढ़ें Hasbunallahu wa ni’mal wakeel.
दिल की घबराहट में ये पढ़ें Allahumma inni a’uzu bika minal hammi wal huzn
तंगी/रोज़गार के लिए ये पढ़ें Rabbi inni lima anzalta…
घर की लड़ाई खत्म करने के लिए ये पढ़ें Rabbana hablana min azwajina…
हर मुसीबत में आयतुल कुर्सी पढ़ें
परेशानी दूर करने के सुन्नती तरीके
नमाज़ मुसीबतों को हल्का कर देती है।
2. इस्तिग़फार (Astaghfirullah) जियादा पढ़ना
हदीस:“इस्तिग़फार हर तंगी का रास्ता खोल देता है।”
3. दुरूद शरीफ
दुरूद पढ़ने से रहमत और बरकत आती है।
4. सब्र (Patience
अल्लाह सब्र करने वालों के साथ है।
दुआ कैसे पढ़ें? (Step-by-Step)
1. वुज़ू करें2.
2 रकअत नफ़्ल नमाज़ पढ़ें (सलातुल हाजत)
3. 41 बार दुआ-ए-यूनुस पढ़ें
4. 7 बार Hasbunallahu wa ni’mal wakeel पढ़ें
5. आखिर में अपनी परेशानी अल्लाह से बखूबी कहें
6. 3–7 दिन लगातार पढ़ें
इस्तिग़फार की ताक़त (इस्लाम में सबसे तेज़ असर)
ज़रूरत के वक्त सिर्फ एक शब्द काफी है:Astaghfirullah
यह:रिज़्क बढ़ाता हैपरेशानी दूर करता हैमन की घबराहट खत्म करता है
FAQs — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. क्या वाकई दुआ से परेशानी दूर होती है?
हाँ, दुआ से दिल का बोझ हल्का होता है और रास्ते खुलते हैं।
2. क्या दुआ की कोई फिक्स संख्या है?
नहीं, लेकिन 41 या 101 बार पढ़ना आम तौर पर बेहतर माना जाता है।
3. क्या महिलाएँ माहवारी में दुआ पढ़ सकती हैं?
हाँ, बिल्कुल पढ़ सकती हैं।
4. क्या सिर्फ दुआ काफी है?
दुआ के साथ कोशिश भी जरूरी है।
अल्लाह कैसे हमारी मुश्किल को आसान बना देता है?
कुरआन में अल्लाह फरमाता है:“
बेशक, मुश्किल के साथ आसानियाँ हैं।”(सूरह अश-शरह: 6)
इस आयत में दो बार “आसानियाँ” कहा गया है — मतलब एक मुश्किल पर दो आसानियाँ! यानी परेशानियां लंबी नहीं रह सकतीं, उनके बाद राहत ज़रूर आती है।
निष्कर्ष
परेशानी जिंदगी का हिस्सा है, लेकिन अल्लाह ने हर मुश्किल के साथ आसानी रखी है। दुआ दिल को सुकून देती है और हर बंद दरवाज़ा खोल देती है।
अगर आप यकीन, सब्र और दुआ के साथ अल्लाह से मदद मांगेंगे—तो आपकी हर टेंशन, हर चिंता और हर परेशानी दूर होगी।
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