todaynamaztime.com

निकाह का तरीका और सुन्नत के मुताबिक गाइड

निकाह का तरीका और सुन्नत के मुताबिक गाइड | निकाह की पूरी जानकारी

निकाह इस्लाम में एक महत्वपूर्ण इबादत और शरई अहद है। यह केवल दो लोगों के बीच मोहब्बत का इज़हार नहीं, बल्कि अल्लाह की रजा और शरई हुक्म के मुताबिक एक कानूनी और हलाल रिश्ता है। अगर आप निकाह का तरीका, शर्तें और सुन्नत के मुताबिक पूरी जानकारी चाहते हैं, तो यह गाइड आपके लिए है।

निकाह का उद्देश्य

निकाह के मुख्य उद्देश्य हैं:

  • अल्लाह की रजा हासिल करना
  • गैर-शरई रिश्तों से बचना
  • संतानों को हलाल तरीके से पैदा करना और उनकी अच्छी परवरिश करना
  • जीवन के सुख-दुःख को साथ में सहना और एक स्थिर पारिवारिक माहौल तैयार करना

निकाह केवल एक भावनात्मक या सामाजिक रिश्ता नहीं, बल्कि एक हलाल और शरई अहद है जो दोनों पक्षों के अधिकार और जिम्मेदारियों को सुनिश्चित करता है।

निकाह के लिए आवश्यक शर्तें

निकाह केवल तब वैध है जब निम्नलिखित शर्तें पूरी हों:

1. वली की मौजूदगी

यदि दुल्हन अविवाहित है, तो उसका वली (अक्सर पिता या अभिभावक) आवश्यक है।

2. दूल्हा और दुल्हन की رضا

दोनों की सहमति अनिवार्य है, और कोई मजबूरी या दबाव नहीं होना चाहिए।

3. महेर का तय होना

महेर दुल्हन को दिया जाने वाला हक है। यह पहले से तय हो सकता है या निकाह के समय तय किया जा सकता है।

4. गवाहों की मौजूदगी

कम से कम दो मुस्लिम गवाह (वयस्क और समझदार) होने चाहिए।

5. इजाब-ओ-कबूल

इजाब (ऑफर) और कबूल (एक्सेप्टेंस) शरई नियमों के अनुसार सार्वजनिक रूप से होना चाहिए।

निकाह का तरीका और सुन्नत के मुताबिक गाइड
निकाह का तरीका और सुन्नत के मुताबिक गाइड

निकाह का तरीका सुन्नत के मुताबिक

1. निकाह की तैयारी

  • दोनों परिवारों के बीच बातचीत और समझौता आवश्यक है
  • महेर का तय होना और निकाह की तारीख फिक्स करना शरई नियमों के अनुसार होना चाहिए
  • दूल्हा और दुल्हन दोनों की इरादे साफ और हलाल होनी चाहिए

2. इजाब-ओ-कबूल

निकाह समारोह में इमाम या किसी ज्ञानी शख्स की मौजूदगी में इजाब-ओ-कबूल किया जाता है।

दूल्हा या उसका वकील कहता है:
“मैं [दुल्हन का नाम] के साथ निकाह करता हूँ, उसके महेर के साथ”

दुल्हन या उसका वकील जवाब देता है:
“मैं कबूल करती हूँ”

3. गवाहों का महत्व

कम से कम दो गवाह होने चाहिए, जो बालिग और समझदार हों। गवाहों का काम केवल यह सुनिश्चित करना है कि निकाह शरई नियमों के अनुसार हो रहा है।

4. महेर का हक

महेर दुल्हन का अधिकार है, जो तुरंत (मुआज्जल) या भविष्य में (मुआज्जल) दिया जा सकता है। महेर की मात्रा और प्रकार दोनों पक्षों की सहमति से तय होता है।

5. निकाह की दुआ

निकाह के बाद इमाम या ज्ञानी से निकाह की दुआ पढ़ी जाती है:
“बारक अल्लाहु लका व बारक अलैक व जमाअा बैनकुमा फी खैर”
अर्थ: “अल्लाह आप दोनों पर बरकत करें और आप दोनों को भले में जोड़े”

निकाह के बाद की सुन्नत

  • वालिदेन और रिश्तेदारों का सम्मान: माता-पिता और परिवार का सम्मान और खुशी का ध्यान रखना।
  • आपस में मोहब्बत और समझदारी: शादी के रिश्ते में धैर्य, प्यार और समझदारी जरूरी है।
  • घर की जिम्मेदारी: दूल्हा और दुल्हन दोनों अपनी जिम्मेदारी समझें।
  • संतानों की परवरिश: निकाह का एक उद्देश्य संतानों को हलाल और अच्छी परवरिश देना भी है।

अहम बातें और नियम

  • निकाह के लिए किसी को मजबूर करना हराम है।
  • यदि कोई पहले से विवाहित है, तो शरई नियमों के अनुसार ही निकाह करना चाहिए।
  • निकाह का अहम हिस्सा हमेशा शरई नियमों और साफ नीयत के साथ होना चाहिए।

निष्कर्ष

निकाह केवल एक सामाजिक रिश्ता नहीं है, बल्कि एक इबादत और शरई फर्ज है। अगर निकाह का अहद सुन्नत और शरई नियमों के अनुसार हो, तो यह दोनों पक्षों के लिए दुनिया और आख़िरत में बरकत और सुकून का जरिया बनता है। हर मुसलमान को चाहिए कि वह निकाह के नियम और आचार को समझे और उसका पालन करे, ताकि एक मजबूत और हलाल पारिवारिक आधार तैयार हो सके।

यह भी पढ़े : Shab e qadr ki dua with tarjuma |शब ए कद्र की दुआ

Wazu ko todne wali chijen |वजू किन चीजों से टूट जाता है

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »
Scroll to Top