नमाज़ पढ़ते समय अक्सर ऐसा होता है कि इंसान से कोई न कोई गलती (bhool) हो जाती है।
कभी रकअत कम या ज़्यादा हो जाती है,
कभी तशह्हुद भूल जाते हैं,
तो कभी शक हो जाता है कि तीसरी रकअत है या चौथी।
ऐसे में ज़्यादातर लोग परेशान हो जाते हैं और सोचते हैं –
👉 “अब मेरी नमाज़ हुई या नहीं?”
👉 “क्या मुझे पूरी नमाज़ दोहरानी पड़ेगी?”
इस्लाम एक आसान दीन है।
नमाज़ में होने वाली अनजानी भूलों के लिए अल्लाह ने एक सुंदर हल रखा है, जिसे सज्दा-ए-सहव (Sajda Sahw) कहते हैं।
इस लेख में आप जानेंगे:
- नमाज़ में कौन-सी गलतियाँ होती हैं
- सज्दा-ए-सहव कब जरूरी होता है
- सज्दा-ए-सहव करने का सही तरीका
- शक की हालत में क्या करें
Sajda Sahw Kya Hai?
सज्दा-ए-सहव उस सज्दे को कहते हैं जो
👉 नमाज़ में भूल या गलती हो जाने पर
👉 नमाज़ के आखिर में किया जाता है
ताकि नमाज़ सही और मुकम्मल हो जाए।
यह अल्लाह की रहमत है कि उसने इंसान की कमजोरी को समझते हुए यह सहूलत दी।

Namaz Mein Kaunsi Galti Ho Sakti Hai?
नमाज़ में आमतौर पर तीन तरह की गलतियाँ होती हैं:
1️⃣ Namaz Mein Kami Ho Jana (कुछ छूट जाना)
जैसे:
- पहली तशह्हुद भूल जाना
- तस्बीह कम पढ़ लेना
- कोई वाजिब अमल छूट जाना
2️⃣ Namaz Mein Ziyadti Ho Jana (कुछ ज्यादा हो जाना)
जैसे:
- एक रकअत ज्यादा पढ़ लेना
- किसी रुक्न को दो बार कर लेना
3️⃣ Namaz Mein Shak Ho Jana (दुविधा)
जैसे:
- 3 रकअत पढ़ी या 4?
- यह दूसरी रकअत है या तीसरी?
Sajda Sahw Kab Karna Chahiye?
✅ सज्दा-ए-सहव इन हालात में करना चाहिए:
✔️ अगर कोई वाजिब छूट जाए
✔️ अगर रकअत में शक हो जाए
✔️ अगर भूल से ज्यादा हो जाए
⚠️ लेकिन अगर फर्ज़ छूट जाए (जैसे रुकू या सज्दा),
तो सिर्फ सज्दा-ए-सहव काफी नहीं होता,
बल्कि उस रकअत को पूरा करना जरूरी होता है।
Sajda Sahw Ka Sahi Tarika (Step by Step)
🟢 तरीका (आम और आसान):
1️⃣ आखिरी रकअत में अत्तहियात पढ़ें
2️⃣ उसके बाद दायें और बायें एक-एक सलाम फेरें
3️⃣ फिर दो सज्दे करें (जैसे नमाज़ के सज्दे)
4️⃣ हर सज्दे में कहें:
Subhana Rabbiyal A‘la
5️⃣ दो सज्दों के बाद फिर से अत्तहियात, दुरूद और दुआ पढ़ें
6️⃣ आखिर में दोनों तरफ सलाम फेर दें
👉 आपकी नमाज़ सही हो जाएगी, इंशा अल्लाह।
Agar Rakat Mein Shak Ho Jaye To Kya Kare?
अगर नमाज़ के दौरान शक हो जाए:
🟡 Rule:
जिस पर ज्यादा यकीन हो, उसी को मानें
Example:
- अगर शक है कि 3 रकअत हुई या 4
- लेकिन दिल कहता है कि 3 ज्यादा सही लगती है
👉 तो 3 मानें
👉 एक रकअत और पढ़ें
👉 आखिर में सज्दा-ए-सहव करें
Baar Baar Galti Hone Par Kya Kare?
कुछ लोगों को बार-बार शक होता है, इसे waswasa कहते हैं।
ऐसे लोगों के लिए हुक्म:
✔️ हर शक पर ध्यान न दें
✔️ जो आमतौर पर करते आए हैं, उसी को मानें
✔️ बार-बार नमाज़ तोड़ना सही नहीं
इस्लाम में दीन को मुश्किल बनाना मना है।
Kya Har Galti Par Sajda Sahw Zaruri Hai?
❌ नहीं।
सज्दा-ए-सहव जरूरी नहीं है अगर:
- सुन्नत या नफ्ल अमल छूट जाए
- छोटी तस्बीह कम हो जाए
- कोई ऐसी भूल जो वाजिब न हो
Sajda Sahw Bhool Jaye To Kya Namaz Ho Jayegi?
अगर:
- गलती छोटी थी
- और इंसान भूल से सज्दा-ए-सहव नहीं कर पाया
👉 तो नमाज़ हो जाती है
👉 अल्लाह ग़फूर और रहम करने वाला है
Namaz Mein Galti Se Bachne Ke Tips
✔️ नमाज़ से पहले ध्यान शांत करें
✔️ जल्दी-जल्दी नमाज़ न पढ़ें
✔️ मोबाइल दूर रखें
✔️ हर रुक्न को सुकून से अदा करें
Sawal–Jawab (FAQ)
❓ Kya sajda sahw farz hai?
👉 नहीं, यह वाजिब है (कुछ हालात में)
❓ Kya namaz ke baad sajda sahw ho sakta hai?
👉 नहीं, नमाज़ के अंदर ही किया जाता है
❓ Kya imam ke peeche bhi sajda sahw hota hai?
👉 हाँ, अगर इमाम करे तो मुक़तदी भी करेगा
Conclusion (निष्कर्ष)
नमाज़ में गलती होना इंसानी फितरत है।
अल्लाह ने इसे समझते हुए सज्दा-ए-सहव जैसी आसान सहूलत दी है।
इसलिए:
❌ घबराने की जरूरत नहीं
❌ बार-बार नमाज़ दोहराने की जरूरत नहीं
✅ सही तरीका सीखिए और इत्मिनान से इबादत कीजिए
अल्लाह हमारी नमाज़ों को कबूल फरमाए। 🤲
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