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Maa Ki Kurbani

इस माँ ने भूख सह ली, लेकिन बच्चों को कभी भूखा नहीं सुलाया 😭 | Maa Ki Kurbani

Maa ki kurbani शब्दों में बयान नहीं की जा सकती, यह कहानी उस माँ की है जिसने खुद भूखी रहकर बच्चों को कभी भूखा नहीं सुलाया।

अगर यह कहानी पढ़कर आपकी आँखें नम न हों…

तो शायद आपने कभी माँ का दर्द बहुत पास से महसूस नहीं किया

माँ का प्यार शब्दों में नहीं होता,
वह त्याग में होता है,
वह खामोशी में होता है,
वह भूखे पेट मुस्कराने में होता है

यह कहानी किसी किताब की नहीं,
यह कहानी हमारे आस-पास रहने वाली हर उस माँ की है
जो खुद टूट जाती है,
लेकिन बच्चों को टूटने नहीं देती।


एक छोटा सा घर, और एक माँ की बड़ी ज़िम्मेदारी

शहर के एक पुराने मोहल्ले में
एक छोटा-सा, टूटा-सा घर था।
उसी घर में रहती थी एक माँ —
साधारण सी, चुप-सी, लेकिन बेहद मज़बूत।

पति का देहांत कई साल पहले हो चुका था।
अब घर का खर्च,
बच्चों की पढ़ाई,
दवा, बिजली, किराया —
सब कुछ उसी माँ के कंधों पर था

उसके पास न कोई सहारा था,
न कोई शिकायत।

उसके पास बस उसके बच्चे थे


माँ का रोज़ का झूठ (जो बच्चों को कभी पता नहीं चला)

हर रात जब खाना बनता,
माँ बच्चों की थाली पहले भरती।

फिर वही एक बात कहती:

“पहले तुम खा लो… मुझे अभी भूख नहीं है।”

बच्चे समझते —
“अम्मा ने पहले ही खा लिया होगा।”

लेकिन सच्चाई यह थी कि
माँ आधी रोटी बच्चों को दे देती,
और खुद पानी पीकर सो जाती

कभी उसने कहा नहीं:

  • आज मैं भूखी हूँ
  • आज बहुत थक गई हूँ
  • आज मेरा दिल टूट गया है

वह बस इतना कहती थी:

“मेरे बच्चे खुश रहें,
बस यही काफी है।”


वह रात जिसने सब कुछ बदल दिया

एक रात माँ को तेज़ बुखार हो गया।
शरीर काँप रहा था,
आँखें खुली नहीं रह पा रही थीं।

बच्चों ने घबराकर कहा:

“अम्मा, डॉक्टर के पास चलो।”

माँ ने कमजोरी में भी मुस्कराकर कहा:

“कुछ नहीं हुआ… सुबह ठीक हो जाएगा।”

लेकिन सुबह माँ उठ ही नहीं पाई

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जब बेटे को सच्चाई का एहसास हुआ

बड़ा बेटा रसोई में गया।
वहाँ कोई खाना नहीं था।
सिर्फ एक सूखी रोटी…
और पास में रखा पानी का गिलास

उसी पल उसे सब समझ आ गया।

उसे याद आया —

  • माँ का रोज़ भूख न लगने का बहाना
  • माँ का हमेशा थका रहना
  • माँ का कभी अपने लिए कुछ न माँगना

उसकी आँखों से आँसू बहने लगे।

वह माँ के पास बैठ गया,
उसका हाथ पकड़ा और रोते हुए बोला:

“अम्मा… आपने हमारे लिए सब कुछ सह लिया,
और हम कभी समझ ही नहीं पाए।”

माँ की आँखों से भी आँसू निकल आए,
लेकिन फिर भी उसने बेटे के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा:

“बस इतना वादा कर दो…
तुम दोनों कभी गलत रास्ते पर मत जाना।”


माँ को कभी बहुत कुछ नहीं चाहिए था

माँ को:

  • महंगे कपड़े नहीं चाहिए थे
  • गहने नहीं चाहिए थे
  • आराम की ज़िंदगी नहीं चाहिए थी

माँ को बस यह चाहिए था कि:

“मेरे बच्चे पढ़-लिख जाएँ,
अपने पैरों पर खड़े हो जाएँ,
और कभी किसी के आगे हाथ न फैलाएँ।”

यही उसकी दुआ थी,
यही उसका सपना था।


यह कहानी सिर्फ एक माँ की नहीं है

यह कहानी:

  • आपकी माँ की हो सकती है
  • मेरी माँ की हो सकती है
  • हर उस माँ की हो सकती है
    जो खुद भूखी रहकर भी बच्चों को पेट भरकर सुलाती है

अगर आपकी माँ आज ज़िंदा है…

तो आज:

  • उसके पास बैठिए
  • उसका हाल पूछिए
  • उसका हाथ थामिए
    और उससे बस इतना कहिए:

“माँ, मुझे आपकी बहुत कदर है।”

क्योंकि माँ का प्यार
इस दुनिया की सबसे बड़ी दौलत है 😭


🙏 एक छोटी-सी गुज़ारिश

अगर यह कहानी पढ़कर
आपकी आँखें थोड़ी-सी भी नम हुई हों,
तो इसे अपनी माँ के नाम समर्पित कर दीजिए।

क्योंकि
माँ से बड़ा इस दुनिया में कुछ भी नहीं।

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