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Ramzan Mein Hum Ye 5 Galtiyan Kyun Dohrate Hain

Ramzan Mein Ye 5 Galtiyan Kyun Dohrate Hain ? Sach kadwa hai

रमज़ान इस्लाम का सबसे मुक़द्दस और रहमतों से भरा महीना है। यह महीना सिर्फ़ रोज़ा रखने या इफ़्तार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इंसान को अंदर से बदलने, अपनी गलतियों पर शर्मिंदा होने और अल्लाह के क़रीब जाने का बेहतरीन मौका देता है।

लेकिन कड़वी सच्चाई यह है कि हर साल रमज़ान आता है, चला जाता है और हमारी ज़िंदगी ज़्यादा नहीं बदलती। हम वही आदतें, वही लापरवाहियाँ और वही गलतियाँ फिर से दोहराते रहते हैं।

सवाल यह है कि आख़िर ऐसा क्यों होता है? क्या हम रमज़ान को सही तरह से समझ नहीं पाते, या फिर हम समझते हुए भी उस पर अमल नहीं करते?

Ramzan Sirf Ek Mahina Nahi, Ek Training Hai

रमज़ान को अगर सही मायनों में समझा जाए, तो यह सिर्फ़ एक महीना नहीं बल्कि एक ट्रेनिंग प्रोग्राम है। यह ट्रेनिंग हमें सब्र सिखाती है, अपने नफ़्स पर काबू करना सिखाती है और दूसरों की तकलीफ़ महसूस कराना सिखाती है।

लेकिन जब हम इस ट्रेनिंग को गंभीरता से नहीं लेते, तब हम वही पुरानी गलतियाँ बार-बार दोहराते हैं।


Galti No. 1: Ramzan Ko Sirf Roza Tak Samajh Lena

हम में से बहुत से लोग रमज़ान को सिर्फ़ भूखा-प्यासा रहने का महीना मान लेते हैं। दिन में कुछ नहीं खाना-पीना और शाम को इफ़्तार कर लेना ही हमें लगता है कि रोज़ा पूरा हो गया।

जबकि हक़ीक़त यह है कि रोज़ा सिर्फ़ पेट का नहीं होता। रोज़ा हमारी ज़ुबान, हमारी नज़र, हमारे कान और हमारे दिल का भी होता है।

अगर कोई इंसान रोज़ा रखकर भी झूठ बोलता है, चुगली करता है, ग़ुस्सा करता है या दूसरों को नीचा दिखाता है, तो उसने रोज़े की असली रूह को नहीं समझा।

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Is Galti Ki Wajah

इस गलती की सबसे बड़ी वजह यह है कि हमें रोज़े का असली मक़सद नहीं सिखाया जाता। हमें सिर्फ़ बताया जाता है कि रोज़ा रखना फ़र्ज़ है, लेकिन यह नहीं बताया जाता कि रोज़ा हमें क्या बनाना चाहता है।

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Sahi Rasta Kya Hai

हमें रोज़े के साथ अपने अख़लाक़ को भी बेहतर बनाना होगा। कम बोलना, अच्छा बोलना और बुरी बातों से खुद को रोकना ही रोज़े की असली कामयाबी है।


Galti No. 2: Quran Se Rishta Sirf Ramzan Tak Rakhna

रमज़ान के महीने में हम क़ुरआन खोलते हैं, तरावीह में सुनते हैं और तिलावत करते हैं। लेकिन जैसे ही ईद आती है, क़ुरआन फिर से अलमारी में बंद हो जाता है।

इसका नतीजा यह होता है कि हमारे दिल पर क़ुरआन का असर अस्थायी रहता है।

Asal Masla Kya Hai

हमने क़ुरआन को सिर्फ़ सवाब कमाने की किताब समझ लिया है, जबकि क़ुरआन असल में ज़िंदगी को सही रास्ता दिखाने की किताब है।

Sahi Tareeqa

रोज़ थोड़ा सा क़ुरआन समझ के साथ पढ़ना शुरू करें। एक आयत भी अगर दिल को छू जाए, तो वही काफ़ी है। क़ुरआन रमज़ान के लिए नहीं, बल्कि पूरी ज़िंदगी के लिए है।


Galti No. 3: Ibadat Aur Taraweeh Ko Bojh Samajhna

कई लोग तरावीह और इबादत को बोझ समझते हैं। उन्हें लगता है कि नमाज़ बहुत लंबी है और जल्दी ख़त्म हो जानी चाहिए।

जब इबादत बोझ लगने लगे, तो समझ लेना चाहिए कि हमारा दिल उस इबादत से जुड़ा नहीं है।

Ramzan Mein Hum Ye 5 Galtiyan Kyun Dohrate Hain

Yeh Galatfehmi Kyun Hoti Hai

हम इबादत को ज़िम्मेदारी समझ लेते हैं, जबकि इबादत अल्लाह से मुलाक़ात होती है।

Behtar Soch

कम इबादत करें लेकिन दिल से करें। यह सोचकर इबादत करें कि पता नहीं अगला रमज़ान मिलेगा या नहीं।

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Galti No. 4: Iftar Aur Sehri Mein Fuzoolkharchi

रमज़ान में इफ़्तार और सहरी को हम ज़रूरत से ज़्यादा भारी बना लेते हैं। तरह-तरह के पकवान, ज़्यादा खाना और दिखावा आम हो गया है।

जबकि रमज़ान सादगी और सब्र सिखाने आता है।

Iska Nuksan

ज़्यादा खाने से न सिर्फ़ सेहत खराब होती है, बल्कि इबादत में सुस्ती भी आ जाती है।

Behtar Amal

सादा इफ़्तार करें, अल्लाह का शुक्र अदा करें और जो मुमकिन हो, ज़रूरतमंदों की मदद करें। बरकत खाने में नहीं, नीयत में होती है।


Galti No. 5: Ramzan Ke Baad Sab Kuch Chhod Dena

सबसे बड़ी गलती यह है कि रमज़ान खत्म होते ही हम सब कुछ छोड़ देते हैं। नमाज़, क़ुरआन और अच्छे अख़लाक़ सब पीछे छूट जाते हैं।

Yeh Kyun Hota Hai

क्योंकि हमने रमज़ान को सुधार की शुरुआत नहीं, बल्कि एक अस्थायी मौसम समझ लिया है।

Sahi Soch

रमज़ान को अपनी ज़िंदगी का मोड़ बनाइए। एक अच्छी आदत को रमज़ान के बाद भी ज़िंदा रखिए।

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Hum Ye Galtiyan Baar Baar Kyun Karte Hain?

इन गलतियों की वजह हमारी पुरानी आदतें, सही मार्गदर्शन की कमी और जल्दी नतीजा चाहने की सोच है।

Ramzan Ko Zindagi Badalne Wala Kaise Banayein

छोटे कदम उठाइए, एक बुरी आदत छोड़िए, एक अच्छी आदत अपनाइए और अल्लाह से सच्चे दिल से मदद माँगिए।

Natija (Conclusion)

रमज़ान हर साल आता है ताकि हमें बेहतर इंसान बनने का मौका मिले। अगर हम हर साल वही गलतियाँ दोहराते रहे, तो नुकसान रमज़ान का नहीं, हमारा है।

आज ही इरादा करें कि यह रमज़ान सिर्फ़ रोज़ों का नहीं, बल्कि पूरी ज़िंदगी बदलने का रमज़ान होगा।

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