रमज़ान का महीना मुसलमानों के लिए बहुत ही पवित्र और बरकत वाला महीना है। इस महीने में रोज़ा रखना फर्ज़ है। रोज़ा सिर्फ भूखा-प्यासा रहना नहीं है, बल्कि यह अपने दिल, ज़ुबान और व्यवहार को सुधारने की ट्रेनिंग है। रोज़े की शुरुआत सेहरी से होती है और अंत इफ्तार से होता है। इसलिए सेहरी और इफ्तार की दुआ जानना बहुत जरूरी है।
1. सेहरी क्या है?
सेहरी वह खाना है जो सुबह फज्र की अज़ान से पहले खाया जाता है। इसे सुहूर भी कहा जाता है। सेहरी करना सुन्नत है और इसमें बहुत बरकत होती है।
2. सेहरी की दुआ (Arabic, Transliteration, Hindi Meaning)
📿 सेहरी की दुआ (Arabic):
وَبِصَوْمِ غَدٍ نَوَيْتُ مِنْ شَهْرِ رَمَضَانَ
Transliteration:
Wa bisawmi ghadin nawaitu min shahri Ramadan.
हिंदी अर्थ:
“मैंने रमज़ान के महीने के कल के रोज़े की नियत की।”
महत्वपूर्ण बात:
रोज़े की नियत दिल से करना ही काफी है। अगर आपके दिल में रोज़ा रखने का इरादा है, तो आपकी नियत हो गई। ज़ुबान से दुआ पढ़ना बेहतर है, लेकिन सिर्फ दिल की नीयत भी मान्य है।
3. सेहरी की फज़ीलत (सेहरी क्यों जरूरी है?)
- सेहरी करना सुन्नत है।
- सेहरी में बरकत होती है।
- पूरे दिन रोज़ा रखने की ताकत मिलती है।
- सेहरी के लिए उठना भी सवाब का काम है।
इसलिए कोशिश करें कि सेहरी कभी न छोड़ें, चाहे थोड़ा सा पानी ही क्यों न पी लें।
4. इफ्तार क्या है?
इफ्तार वह समय है जब सूरज डूबने के बाद रोज़ा खोला जाता है। यह दिन का सबसे रहमत वाला समय होता है। इस वक्त की गई दुआ खास तौर पर कबूल होती है।

5. Roza Kholne Ki Dua 1 (Arabic, Transliteration, Hindi Meaning)
📿 Arabic:
اللَّهُمَّ إِنِّي لَكَ صُمْتُ وَبِكَ آمَنْتُ وَعَلَيْكَ تَوَكَّلْتُ وَعَلَى رِزْقِكَ أَفْطَرْتُ
Transliteration:
Allahumma inni laka sumtu wa bika aamantu wa ‘alayka tawakkaltu wa ‘ala rizqika aftartu.
हिंदी अर्थ:
“ऐ अल्लाह! मैंने तेरे लिए रोज़ा रखा, तुझ पर ईमान लाया, तुझ पर भरोसा किया और तेरे दिए हुए रिज़्क से इफ्तार किया।”
6. इफ्तार की दूसरी दुआ (Arabic, Transliteration, Hindi Meaning)
📿 Arabic:
ذَهَبَ الظَّمَأُ وَابْتَلَّتِ الْعُرُوقُ وَثَبَتَ الأَجْرُ إِنْ شَاءَ اللَّهُ
Transliteration:
Zahabaz zama’u wabtallatil urooq wa thabatal ajru in sha Allah.
हिंदी अर्थ:
“प्यास खत्म हो गई, नसें तर हो गईं और इंशाअल्लाह सवाब पक्का हो गया।”
7. इफ्तार करने का सही तरीका
- सूरज डूबते ही इफ्तार करें।
- खजूर से रोज़ा खोलना बेहतर है।
- खजूर न हो तो पानी से इफ्तार करें।
- इफ्तार से पहले दुआ जरूर पढ़ें।
- खाने में फिजूलखर्ची न करें।
8. अगर दुआ याद न हो तो क्या करें?
अगर आपको अरबी दुआ याद नहीं है, तो आप अपनी भाषा में भी नियत और दुआ कर सकते हैं। अल्लाह दिलों के इरादे को जानता है। सबसे जरूरी चीज सच्ची नीयत है।
9. रोज़े का असली मकसद
रमज़ान हमें सिखाता है:
- सब्र करना
- गुस्से पर काबू रखना
- झूठ और गाली से बचना
- गरीबों की मदद करना
- अल्लाह के करीब होना
अगर इंसान रोज़ा रखकर भी बुरे काम करे, तो रोज़े का असली फायदा नहीं मिलता।
10. निष्कर्ष
सेहरी और इफ्तार की दुआ रोज़े का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। नियत दिल से होती है, लेकिन दुआ पढ़ना सुन्नत और सवाब का काम है। रमज़ान हमें अपनी जिंदगी सुधारने का सुनहरा मौका देता है।
आइए हम इस पवित्र महीने में सही तरीके से रोज़ा रखें, दुआएं पढ़ें और अपने अंदर अच्छे बदलाव लाएं।
अल्लाह हम सबके रोज़े, दुआएं और इबादत कबूल फरमाए।
आमीन 🤲
यह भी पढ़ें : रमजान में यह पांच क्यूं दोहराते हैं लोग
यह भी पढ़ें : क्या रोज की हालत में कोलगेट करने से रोजा टूट है क्या
और यह भी पढ़ें : iftar ka time dekhe yahan se
यह भी पढ़ें : नापाकी की हालत में औरत क्या क्या कर सकती है




