रमज़ान का महीना रहमत, मग़फिरत और जहन्नम से निजात का महीना है। इस महीने में रोज़ा रखना हर बालिग़ और समझदार मुसलमान पर फ़र्ज़ है। लेकिन बहुत से लोगों के दिल में एक अहम सवाल उठता है — क्या नापाकी (जनाबत) की हालत में रोज़ा रखा जा सकता है?
कई लोग फज्र के वक्त तक ग़ुस्ल न होने पर परेशान हो जाते हैं और समझते हैं कि शायद उनका रोज़ा नहीं होगा। इस लेख में हम इस मसले को साफ, आसान और भरोसेमंद तरीके से समझेंगे।
Napaki (Janabat) Kya Hoti Hai?
इस्लामी शरीअत में “जनाबत” उस हालत को कहा जाता है जब:
- पति-पत्नी के बीच शारीरिक संबंध हुआ हो।
- या सोते समय एहतलाम (सपने में वीर्य निकलना) हुआ हो।
ऐसी स्थिति में ग़ुस्ल फ़र्ज़ हो जाता है। जब तक ग़ुस्ल न किया जाए, नमाज़ नहीं पढ़ी जा सकती। लेकिन यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि ग़ुस्ल नमाज़ के लिए जरूरी है, रोज़े के लिए नहीं।
Kya Janabat Ki Halat Mein Roza Sahih Hai?
जी हाँ। अगर किसी व्यक्ति पर जनाबत की हालत हो और फज्र की अज़ान हो जाए, लेकिन उसने रोज़े की नीयत कर ली हो, तो उसका रोज़ा बिल्कुल सही है।
हदीस से साबित है कि नबी करीम ﷺ कभी-कभी रमज़ान में जनाबत की हालत में फज्र का वक्त पा लेते थे, फिर ग़ुस्ल करते और रोज़ा रखते थे।
इससे साफ़ साबित होता है:
- ग़ुस्ल रोज़े की शर्त नहीं है।
- नीयत रोज़े की बुनियाद है।
- फज्र के बाद ग़ुस्ल करने से रोज़ा नहीं टूटता।

Roza Aur Namaz Mein Kya Farq Hai?
बहुत सी गलतफहमियाँ इसलिए होती हैं क्योंकि लोग रोज़ा और नमाज़ के हुक्म को मिला देते हैं।
Namaz Ke Liye:
- पाकी जरूरी है।
- वुज़ू या ग़ुस्ल के बिना नमाज़ नहीं होती।
Roza Ke Liye:
- फज्र से मग़रिब तक खाने-पीने और संबंध से रुकना जरूरी है।
- जनाबत की हालत रोज़ा नहीं तोड़ती।
Auraton Ke Liye Kya Hukm Hai?
अगर किसी औरत का हैज़ फज्र से पहले खत्म हो गया हो, लेकिन वह फज्र से पहले ग़ुस्ल न कर पाई हो, तो वह रोज़ा रख सकती है।
शर्त यह है:
- हैज़ फज्र से पहले बंद हो चुका हो।
- रोज़े की नीयत कर ली गई हो।
लेकिन अगर हैज़ फज्र के बाद बंद हुआ, तो उस दिन का रोज़ा सही नहीं होगा और बाद में उसकी क़ज़ा करनी होगी।
Din Mein Ehtelam Ho Jaye To Kya Roza Tootta Hai?
अगर दिन के समय सोते हुए एहतलाम हो जाए तो:
- रोज़ा नहीं टूटता।
- यह इंसान के बस में नहीं है।
- सिर्फ ग़ुस्ल करना जरूरी है।
इस्लाम मजबूरी पर गुनाह नहीं लिखता।
Kaun Si Cheezen Roza Todti Hain?
रोज़ा इन चीज़ों से टूटता है:
- जानबूझकर खाना या पीना।
- जानबूझकर संबंध बनाना।
- हैज़ या निफ़ास शुरू होना।
- जानबूझकर उल्टी करना।
लेकिन सिर्फ नापाकी की हालत में होना रोज़ा तोड़ने वाली चीज़ नहीं है।
Aham Nasihat
हालाँकि जनाबत की हालत में रोज़ा सही है, लेकिन जानबूझकर ग़ुस्ल में देरी करना ठीक नहीं, खासकर अगर नमाज़ क़ज़ा हो जाए।
रमज़ान सिर्फ भूखा रहने का नाम नहीं है, बल्कि नमाज़, तिलावत, दुआ और तौबा का महीना है।
Aam Galatfahmiyan
Galatfahmi 1:
अगर फज्र के वक्त ग़ुस्ल नहीं किया तो रोज़ा नहीं होगा।
✔ सही बात: रोज़ा होगा। ग़ुस्ल नमाज़ के लिए जरूरी है, रोज़े के लिए नहीं।
Galatfahmi 2:
रमज़ान में रात को संबंध बनाना गुनाह है।
✔ सही बात: इफ्तार से फज्र तक पति-पत्नी के बीच संबंध जायज़ है।
Galatfahmi 3:
एहतलाम से रोज़ा टूट जाता है।
✔ सही बात: नहीं। क्योंकि यह इंसान के बस में नहीं है।
Natija (Conclusion)
नापाकी (जनाबत) की हालत में अगर फज्र का वक्त हो जाए और ग़ुस्ल बाकी हो, तो रोज़ा बिल्कुल सही है।
याद रखें:
- ग़ुस्ल नमाज़ के लिए जरूरी है।
- रोज़े के लिए नीयत जरूरी है।
- एहतलाम से रोज़ा नहीं टूटता।
- फज्र से पहले संबंध जायज़ है।
अल्लाह तआला हम सबके रोज़े कबूल फरमाए और हमें सही समझ अता करे। आमीन।
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