सूरह यासीन कुरआन शरीफ की 36वीं सूरह है और इसमें कुल 83 आयतें हैं। यह मक्का में नाज़िल हुई और इसे मुसलमानों के बीच खास मकाम हासिल है। इस सूरह को “Quran ka Dil” कहा जाता है क्योंकि इसमें ईमान के बुनियादी उसूल बहुत असरदार तरीके से बयान किए गए हैं।
Why Surah Yaseen is Called the Heart of Quran
हदीस शरीफ में आया है कि हर चीज़ का एक दिल होता है और कुरआन का दिल सूरह यासीन है। इस सूरह में तौहीद (अल्लाह की एकता), रिसालत (नबी ﷺ की सच्चाई) और आख़िरत (क़यामत और हिसाब) का पूरा पैगाम मौजूद है।
Main Message of Surah Yaseen
सूरह यासीन इंसान को याद दिलाती है कि अल्लाह ही सब कुछ पैदा करने वाला है। वही जिंदगी देता है और वही मौत देता है। एक दिन ऐसा आएगा जब सभी इंसान दोबारा जिंदा किए जाएंगे और अपने हर कर्म का हिसाब देंगे। इसमें जन्नत की खुशखबरी और जहन्नम की चेतावनी साफ तौर पर बयान की गई है।

Surah Yaseen shareef Hindi mein
SURAH–36 (Yaseen)
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
- या – सीन
- वल्कुरआनिल – हकीम
- इन्न – क ल – मिनल – मुर्सलीन
- अला सिरातिम् – मुस्तकीम
- तन्जीलल अज़ीजिर – रहीम
- लितुनज़िर – कौमन मा उन्जिर – आबाउहुम फहुम गाफिलून
- ल-क़द हक्कल – क़ौलु अला अकसरिहिम फहुम ला युमिनून
- इन्ना जअल्ना फी अअ्नाकिहिम अगलालन फही – य इलल – अजकानि फहुम मुक्महून
- व जअल्ना मिम्बैनि ऐदीहिम सद्दं – व मिन खल्फिहिम सद्दन फअग्शैनाहुम फहुम ला युब्सिरून
- व सवाउन अलेहिम अ – अन्जर – तहुम अम लम तुन्जिरहुम ला युमिनून
- इन्नमा तुन्जिरु मनित्त – ब – अज़्जिक्र व खशिय – रह्मा – न बिलगैबि फबश्शिरहु बिमगफिरतिं – व अज्रिन करीम
- इन्ना नह्नु नुह्यिल – मौता व नक्तुबु मा कद्दमु व आसारहुम, व कुल्ल – शैइन अह्सैनाहु फी इमामिम – मुबीन
- वद्रिब लहुम मसलन असहाबल – क़र्यति इज़ जा – अहल – मुरसलून
- इज़ अरसलना इलैहिमुस्नैनि फकज्जबूहुमा फअज्जज्ना बिसालिसिन फक़ालू इन्ना इलैकुम मुरसलून
- क़ालू मा अन्तुम इल्ला बशरुम – मिस्लुना व मा अन्जलर – रह्मानु मिन शैइन इन अन्तुम इल्ला तक्जिबून
- क़ालू रब्बुना यअलमु इन्ना इलैकुम लमुरसलून
- व मा अलैना इल्लल – बलागुल – मुबीन
- क़ालू इन्ना तत्य्यरना बिकुम लइन लम तन्तहू लनर्जुमन्नकुम व लयमस्सन्नकुम मिन्ना अज़ाबुन अलीम
- क़ालू ताएरुकुम मअकुम अइन् ज़ुक्किरतुम बल अन्तुम कौमुम मुस्रिफून
- व जा – अ मिन अकससल – मदीनति रजुलुं यसआ क़ाला या कौमित्तबिउल – मुरसलीन
- इत्तबिउ मन ला यसअलुकुम अज्रं व हुम मुहतदून
- व मा लि – य ला अबुदुल्लज़ी फतरनि व इलैहि तुरजऊन
- अत्तखिजु मिन दूनिही आलिहतन इय्युरिद्निर – रह्मानु बिदुर्रिन ला तुग्नि अन्नी शफाअतूहुम शैअं व ला युन्किजून
- इन्नी इज़ल – लफी दलालिम – मुबीन
- इन्नी आमन्तु बिरब्बिकुम फस्मऊन
- क़ीलद्खुलिल – जन्नह क़ाला या लैता कौमी यअलमून
- बिमा गफरली रब्बी व जअलनी मिनल – मुकरमीन
- व मा अन्जलना अला कौमिही मिम्बअदिही मिन जुन्दिम – मिनस्समाइ व मा कुन्ना मुनज़िलीन
- इन् कानत इल्ला सैहतं – वाहिदतन फइज़ा हुम खामिदून
- या हस्रतन अलल – इबादि, मा यअतीहिम मिर – रसूलिन इल्ला कानू बिही यस्तह्जिऊन
- अलम यरौ कम अह्लक्ना क़बलहुम मिनल – कुरूनि अन्नहुम इलैहिम ला यरजिऊन
- व इन् कुल्लुल्लम्मा जमीउल्लदैना मुहजरून
- व आयतुल्लहुमुल – अर्जुल – मैय्ततु अह्यैनाहा व अखरज्ना मिन्हा हब्बं फमिन्हु यअकुलून
- व जअल्ना फीहा जन्नातिम – मिन नखीलिं – व अअ्नाबिं – व फज्जरना फीहा मिनल – उयू़न
- लियअकुलू मिन समरिही व मा अमिलतहु ऐदीहिम, अफला यशकुरून
- सुब्हानल्लज़ी खलक़ल – अज़्वाजा कुल्लहा मिम्मा तुन्बितुल – अर्जु व मिन अन्फुसिहिम व मिम्मा ला यअलमून
- व आयतुल्लहुमुल – लै्लु नस्लखु मिन्हुन – नहार फइज़ा हुम मुज़्लिमून
- वश्शम्सु तज्री लिमुस्तक़र्रिल – लहा, ज़ालिक तक़दीरुल अज़ीजिल – अलीम
- वल – क़मर क़द्दरनाहु मनाज़िल हत्ता आ – द कलउर्जूनिल – क़दीम
- लश्शम्सु यम्बगी लहा अन तुद्रिकल – क़मर व लल्लैलु साबिकुन – नहारि व कुल्लुन फी फलकिन – यसबहून
- व आयतुल्लहुम अन्ना हमल्ना ज़ुर्रिय्यतहुम फिल – फुल्किल – मशहून
- व खलक्ना लहुम मिम्मा मिस्लिही मा यरकबून
- व इन् नशअ नुग्रिक्हुम फला सरीख लहुम व ला हुम युनक़जून
- इल्ला रह्मतम – मिन्ना व मता अन इला हीन
- व इज़ा क़ील लहुमुत्तकू मा बैन ऐदीकुम व मा खल्फकुम लअल्लकुम तुरहमून
- व मा तअतीहिम मिन आयतिम – मिन आयाति रब्बिहिम इल्ला कानू अन्हा मुअरिदीन
- व इज़ा क़ील लहुम अन्फिकू मिम्मा रज़ककुमुल्लाह क़ालल्लज़ीना कफरू लिल्लज़ीना आमनू अनुतइमु मन लव यशाउल्लाह अतअमहू इन अन्तुम इल्ला फी दलालिम – मुबीन
- व यकूलूना मता हाज़ल – वअ्दु इन् कुन्तुम सादिकीन
- मा यन्जुरूना इल्ला सैहतं – वाहिदतन तअखुज़ुहुम व हुम यखिस्सिमून
- फला यस्ततीऊन तौसियतं – व ला इला अह्लिहिम यरजिऊन
- व नुफिख फिस्सूरी फइज़ा हुम मिनल – अजदासि इला रब्बिहिम यन्सिलून
- क़ालू या वैलना मम्बअसना मिर – मरकदिना, हाज़ा मा वअदर – रह्मानु व सदकल – मुरसलून
- इन् कानत इल्ला सैहतं – वाहिदतन फइज़ा हुम जमीउल्लदैना मुहजरून
- फल – यौम ला तुज़्लमु नफ्सुन शैअं व ला तुजज़ौना इल्ला मा कुंतुम तअमलून
- इन् असहाबल – जन्नतिल – यौम फी शुगुलिन फाकिहून
- हुम व अज़्वाजुहुम फी ज़िलालिन अलल – अराइकि मुत्तकिऊन
- लहुम फीहा फाकिहतुन व लहुम मा यद्उून
- सलामुन, क़ौलम – मिर्रब्बिर – रहीम
- वम्ताज़ुल – यौम अय्युहल – मुजरिमून
- अलम अअहद इलैकुम या बनी आदम अन्ल्ला तअबुदुश्शैतान इन्नहु लकुम अदुव्वुम – मुबीन
- व अन्निबुदूनी, हाज़ा सिरातुम – मुस्तकीम
- व ल-क़द अज़ल्ल मिन्कुम जिबिल्लन कसीरन, अफलम तकूनू तअकिलून
- हाज़िही जहन्नमुल्लती कुंतुम तुअदून
- इस्लौहल – यौम बिमा कुंतुम तक्फुरून
- अल – यौम नख्तिमु अला अफ्वाहिहिम व तुकल्लिमुना ऐदीहिम व तश्हदु अर्जुलुहुम बिमा कानू यकसीबून
- व लव नशाउ लतमस्ना अला अयुनिहिम फस्तबकुस्सिरात फअन्ना युब्सिरून
- व लव नशाउ लमसख्नाहुम अला मकानतिहिम फमस्तताऊ मजिय्यं – व ला यर्जिऊन
- व मन नुअम्मिरहु नुनक्किस्हु फिल्खल्कि अफला यअकिलून
- व मा अल्लम्नाहुश्शिअर व मा यम्बगी लहू, इन हुआ इल्ला ज़िक्रुन – व कुरआनुम – मुबीन
- लियुन्जिर मन कान हय्यं – व यहिक्कल – क़ौलु अलल – काफिरीन
- अ व लम यरौ अन्ना खलक्ना लहुम मिम्मा अमिलत ऐदिना अनआमन फहुम लहा मालिकून
- व ज़ल्लल्नाहा लहुम फमिन्हा रकूबुहुम व मिन्हा यअकुलून
- व लहुम फीहा मनाफिउ व मशारिबु अफला यशकुरून
- वत्तखज़ू मिन दूनिल्लाहि आलिहतल – लअल्लहुम युन्सरून
- ला यस्ततीऊन नस्रहुम व हुम लहुम जुनदम – मुहजरून
- फला यहज़ुनक़ क़ौलुहुम इन्ना नअलमु मा युसिर्रून व मा युअलिनून
- अ व लम यरल – इंसानु अन्ना खलक्नाहु मिन नुत्फतिन फइज़ा हुआ खसीमुम – मुबीन
- व दरब लना मसलं – व नसी खलकह, क़ाला मन युह्यिल – इज़ामा व हिया रमीम
- कुल युह्यीहल – लज़ी अंशअहा अव्वल मर्रतिं – व हुआ बिकुल्लि खल्किन अलीम
- अल्लज़ी जअल लकुम मिनश्शजरिल – अख्दरि नारं फइज़ा अन्तुम मिन्हु तूकिदून
- अ व लयसल्लज़ी खलकस्समावाति वलअर्ज बि-कादिरिन अला अय्यख्लुक मिस्लहुम, बला, व हुआल – खल्लाकुल – अलीम
- इन्नमा अम्रुहु इज़ा अरादा शैअन अय्यकूल लहू कुन फयकून
- फसुब्हानल्लज़ी बियदिही मलकूतु कुल्लि शैइन व इलैहि तुरजऊन
Benefits of Reciting Surah Yaseen
सूरह यासीन पढ़ने की कई फज़ीलतें बताई गई हैं:
- दिल को सुकून मिलता है
- मुश्किल हालात में आसानी आती है
- गुनाहों की माफी की उम्मीद होती है
- बीमार या मरने वाले के पास पढ़ना सवाब का कारण है
Lessons from Surah Yaseen
इस सूरह से हमें यह सीख मिलती है कि दुनिया अस्थायी है और आख़िरत की तैयारी जरूरी है। अल्लाह की निशानियों पर गौर करना चाहिए और नेकी का रास्ता अपनाना चाहिए।
Conclusion
सूरह यासीन सिर्फ पढ़ने की सूरह नहीं है बल्कि समझने और अमल करने की सूरह है। अगर हम इसके संदेश को अपनी जिंदगी में उतार लें तो दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी मिल सकती है।
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