Ramzan का महीना रहमत, बरकत और मग़फ़िरत का महीना है। पूरे दिन रोज़ा रखने के बाद जब सूरज डूबता है और अज़ान की आवाज़ आती है, तो दिल में एक अलग ही सुकून उतरता है। यही वक़्त होता है इफ़्तार का। लेकिन एक अहम सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है — इफ़्तार किस चीज़ से करना चाहिए? क्या सिर्फ़ कोई भी चीज़ खा लेना काफी है, या इसके पीछे कोई सुन्नत और हिकमत भी है?
इस लेख में हम इसी विषय को कुरआन, हदीस, सेहत और आम ज़िंदगी की समझ के साथ आसान भाषा में समझेंगे।
इफ़्तार का असली मतलब
इफ़्तार का मतलब है रोज़ा खोलना। यानी फज्र से लेकर मग़रिब तक खाने-पीने से रुकने के बाद अल्लाह का नाम लेकर फिर से हलाल चीज़ से शुरुआत करना। रोज़ा सिर्फ भूख-प्यास का नाम नहीं है, बल्कि सब्र, शुक्र और तक़वा का इम्तिहान है। इसलिए इफ़्तार भी सिर्फ खाने का समय नहीं, बल्कि शुक्र अदा करने का लम्हा है।
सुन्नत तरीका क्या है?
1️⃣ खजूर से इफ़्तार करना
हदीसों में आता है कि नबी-ए-करीम ﷺ ताज़ा खजूर (रुतब) से इफ़्तार करते थे। अगर ताज़ा खजूर न मिलती, तो सूखी खजूर से, और अगर वह भी न हो तो पानी से।
यानी सबसे अफ़ज़ल तरीका है:
- पहले खजूर खाना
- फिर पानी पीना
क्यों खजूर?
खजूर में प्राकृतिक शुगर होती है जो पूरे दिन की कमजोरी तुरंत दूर करती है। पेट पर भारी भी नहीं पड़ती और ऊर्जा जल्दी देती है। इसीलिए यह सिर्फ़ धार्मिक ही नहीं, बल्कि सेहत के लिहाज़ से भी बेहतरीन विकल्प है।
2️⃣ अगर खजूर न हो तो?
अगर किसी वजह से खजूर न मिले, तो सिर्फ पानी से इफ़्तार करना भी सुन्नत है। पानी शरीर को हाइड्रेट करता है और रोज़े के बाद सबसे पहले शरीर को तरावट देता है।

इफ़्तार में और क्या खाना चाहिए?
इफ़्तार की शुरुआत हल्की और आसान चीज़ से करनी चाहिए। उसके बाद नमाज़ पढ़कर आराम से खाना खाना बेहतर है।
हल्की और अच्छी चीज़ें:
- खजूर
- पानी
- फल (केला, सेब, पपीता)
- दही
- हल्का सूप
क्या ज़्यादा नहीं खाना चाहिए?
- बहुत तला-भुना
- बहुत ज़्यादा मसालेदार
- ज़्यादा मीठा
आजकल इफ़्तार को दावत बना दिया जाता है। समोसा, पकौड़ी, चाट, कोल्ड ड्रिंक — ये सब स्वाद में अच्छे लगते हैं, लेकिन रोज़ा खोलते ही ज़्यादा तला-भुना खाना पेट पर बोझ डालता है।
इफ़्तार से पहले की दुआ
इफ़्तार के वक़्त दुआ कबूल होने का खास मौका होता है। इसलिए खाना शुरू करने से पहले अल्लाह से दिल से दुआ मांगनी चाहिए।
रोज़ा खोलते समय मशहूर दुआ है:
“Allahumma inni laka sumtu wa bika aamantu wa ‘alayka tawakkaltu wa ‘ala rizqika aftartu.”
लेकिन याद रखिए — दुआ दिल की सच्चाई से होनी चाहिए, सिर्फ ज़ुबान से नहीं।
क्या सिर्फ खजूर से ही इफ़्तार करना जरूरी है?
नहीं। खजूर से इफ़्तार करना सुन्नत और बेहतर तरीका है, लेकिन अगर कोई दूसरी हलाल चीज़ से रोज़ा खोले तो रोज़ा सही है। इस्लाम आसानी का दीन है। अल्लाह ने कोई मजबूरी नहीं रखी।
अगर आपके पास सिर्फ पानी है — तो वही काफी है।
अगर फल है — तो उससे भी कर सकते हैं।
अहम बात है: हलाल और पाक चीज़ हो।
सेहत के नजरिये से सही इफ़्तार
आजकल डॉक्टर भी सलाह देते हैं कि लंबे उपवास के बाद शरीर को धीरे-धीरे खाना चाहिए।
सही तरीका:
- पहले 1–3 खजूर
- एक गिलास पानी
- मग़रिब की नमाज़
- फिर हल्का खाना
इससे शरीर को झटका नहीं लगता और पाचन भी सही रहता है।
इफ़्तार में संतुलन क्यों जरूरी है?
रोज़ा हमें सब्र सिखाता है। अगर पूरे दिन भूखे रहने के बाद हम इफ़्तार में हद से ज़्यादा खा लें, तो रोज़े का मकसद कमजोर हो जाता है।
अल्लाह ने कुरआन में भी फिजूलखर्ची से मना किया है। इसलिए इफ़्तार में:
- दिखावा न करें
- ज़रूरत से ज़्यादा न पकाएं
- गरीबों का भी ख्याल रखें
दूसरों को इफ़्तार कराना
हदीस में आता है कि जो किसी रोज़ेदार को इफ़्तार कराता है, उसे भी रोज़ेदार जितना सवाब मिलता है।
इसलिए कोशिश करें:
- किसी गरीब को खाना दें
- मस्जिद में इफ़्तार भेजें
- पड़ोसी का ख्याल रखें
इफ़्तार सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि बाँटने का नाम भी है।
आम गलतियाँ जो लोग करते हैं
- अज़ान से पहले ही खाना शुरू कर देना
- इफ़्तार को पार्टी बना देना
- बहुत भारी खाना
- नमाज़ छोड़कर खाने में लग जाना
हमें इन गलतियों से बचना चाहिए।
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इफ़्तार और शुक्र का रिश्ता
जब हम पूरे दिन भूखे-प्यासे रहते हैं, तब हमें उन लोगों का एहसास होता है जो रोज़ ऐसे ही रहते हैं। इफ़्तार का पहला निवाला हमें यह याद दिलाता है कि अल्लाह ने हमें कितनी नेमतें दी हैं।
इसलिए इफ़्तार सिर्फ खाने का नाम नहीं, बल्कि:
- शुक्र अदा करने का वक़्त
- दुआ मांगने का मौका
- खुद को बेहतर इंसान बनाने का जरिया
बच्चों और बुज़ुर्गों के लिए क्या ध्यान रखें?
- बच्चों को बहुत तला-भुना न दें
- बुज़ुर्गों को हल्का और आसानी से पचने वाला खाना दें
- पानी की मात्रा सही रखें
क्या कोल्ड ड्रिंक से इफ़्तार करना सही है?
तकनीकी रूप से हलाल है, लेकिन सेहत के लिहाज़ से बेहतर नहीं। रोज़ा खोलते ही बहुत ठंडा या गैस वाला पेय पेट को नुकसान पहुँचा सकता है। इसलिए पहले पानी या नींबू पानी बेहतर है।
एक आदर्श इफ़्तार की तस्वीर
- 3 खजूर
- एक गिलास पानी
- थोड़े फल
- मग़रिब की नमाज़
- फिर सादा खाना (दाल, रोटी, सब्ज़ी या हल्का चावल)
यही संतुलित और सुन्नत के करीब तरीका है।
निष्कर्ष
इफ़्तार खजूर और पानी से करना सबसे बेहतर और सुन्नत तरीका है।
अगर खजूर न हो तो पानी से भी रोज़ा खोला जा सकता है।
हमें चाहिए कि इफ़्तार को दिखावे और ज़्यादा खाने का ज़रिया न बनाएं, बल्कि शुक्र, सादगी और बांटने का मौका समझें।
रमज़ान हमें सिखाता है कि असली खुशी पेट भरने में नहीं, बल्कि दिल भरने में है।
अल्लाह हम सबके रोज़े कबूल फरमाए और हमें सुन्नत के मुताबिक इफ़्तार करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
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