आज के समय में “लव मैरिज” एक आम चर्चा का विषय है। बहुत से युवा यह जानना चाहते हैं कि क्या इस्लाम में लव मैरिज जायज़ है, इसके क्या नियम हैं, माता-पिता की रज़ामंदी की क्या अहमियत है और सही तरीका क्या है? इस आर्टिकल में हम इस्लामी नज़रिया, शरीअत की दलीलें, सुन्नत का तरीका और लव मैरिज से जुड़ी हर जरूरी बात को आसान भाषा में समझेंगे।
Love Marriage Kya Hoti Hai?
लव मैरिज वह निकाह है जिसमें लड़का और लड़की एक-दूसरे को पसंद करते हैं और आपसी इरादे से शादी करने का फैसला लेते हैं। इस्लाम में शादी दो लोगों की रज़ामंदी से ही होती है, इसलिए किसी भी निकाह में ख़ुशी और राज़ी-मंदी सबसे पहली शर्त है।
Islam Mein Love Marriage Jaiz Hai Ya Nahi?
इस्लाम में लव मैरिज हराम नहीं है, बल्कि जायज़ है — बशर्ते कि:
- रिश्ता पूरी तरह हलाल तरीके से हो
- Zina (गैर-शादीशुदा रिश्ते) में न पड़े
- लड़का-लड़की दोनों बालीग हों
- माता-पिता को बताएँ और उनको मनाने की कोशिश करें
- सही इस्लामी तरीका अपनाएँ
इस्लाम में मजबूरी, ज़बरदस्ती या दबाव में की गई शादी मान्य नहीं है।
निकाह तभी होता है जब लड़की की राज़मंदी मौजूद हो।
Quran Aur Hadith Mein Love Marriage Ka Zikr
इस्लाम ने निकाह को आसान और हलाल रास्ता बताया है:
1. कुरआन में इरादे और रज़ामंदी की अहमियत
“और उनमें से हर एक के लिए हमने जोड़ी बनाई ताकि वह सुकून पाए।”
(कुरआन 30:21)
इस आयत से पता चलता है कि शादी प्यार, सुकून और मोहब्बत पर आधारित होती है।

2. हदीस में लड़की की रज़ामंदी की शर्त
हज़रत मुहम्मद ﷺ ने फ़रमाया:
“बिना लड़की की रज़ामंदी के उसकी शादी नहीं की जाएगी।”
इससे साफ है कि इस्लाम में किसी की पसंद-नापसंद का ध्यान रखना ज़रूरी है।
Love Marriage & Islam – Kya Zaruri Shartein Hain?
1. Dono Ka Halal Tareeqe Se Baat Karna
इस्लाम में लड़का-लड़की का गैर-मह्रम होने के नाते फ्री-हैंड बातचीत, डेटिंग, हाथ पकड़ना आदि नाजायज़ है।
लेकिन निकाह के इरादे से, सीमाओं में रहते हुए बात करना जायज़ है।
2. Wali (Guardian) Ki Ijazat
लड़की की शादी में उसका वली (पिता/भाई/चाचा) की मौजूदगी सुन्नत और सही तरीका है।
अगर वली बिना वजह मना करे, तो लड़की काज़ी/शरीअत जज के ज़रिए निकाह कर सकती है।
3. Mahr (Meher) Ka Tay Hona
निकाह तभी मुकम्मल होता है जब लड़का लड़की के लिए मेहर तय करे।
4. Do Gawah Ka Hona
दो मुसलमान गवाहों की मौजूदगी निकाह की शर्त है।
Love Marriage Ka Sahih Islamic Tareeqa
अगर आप लव मैरिज करना चाहते हैं, तो नीचे दिया तरीका 100% इस्लामी और सुन्नत के मुताबिक़ है:
Step 1: Halal Intention
पहले अपने इरादे को सही करें —
“हम निकाह करना चाहते हैं क्योंकि यह अल्लाह की पसंद है।”
Step 2: Parents Ko Batana
सबसे पहले अपने परिवार को बताएं।
माता-पिता की दुआ और सहमति से निकाह में बरकत होती है।
Step 3: Rishta Proper Way Mein Bhijwana
- लड़का परिवार के ज़रिए लड़की के घर रिश्ता भेजे
- दोनों परिवार मिलकर बात करें
- लड़की-लड़के को हलाल दायरे में मिलने/बात करने की इजाज़त दी जाए
Step 4: Nikah Ki Date Fix Karna
- मेहर तय हो
- गवाह तय हों
- निकाह पढ़ाने वाला (क़ाज़ी/इमाम) निश्चित करें
Step 5: Nikah Ceremony
- लड़की की रज़ामंदी ली जाए
- लड़का निकाह पढ़े
- दुआ की जाए
Step 6: Walima
निकाह के बाद वलीमा सुन्नत है।
Parents Ki Razaamandi Kyun Zaruri Hai?
इस्लाम में माता-पिता की इज्ज़त बहुत अहम है।
इसलिए:
- उनकी दुआ से जिंदगी में बरकत आती है
- शादी टिकाऊ और खुशहाल रहती है
- घर टूटने से बचता है
- समाज में इज्जत बनी रहती है
लेकिन अगर माता-पिता किसी गलत वजह से मना करें —
जैसे जाति, समाज, पैसे, जिद —
तो लड़की/लड़का शरई तरीके से निकाह कर सकते हैं।
Love Marriage Ke Fayde
- एक-दूसरे को पहले से समझना
- Compatibility अच्छी होना
- शादी में प्यार और सम्मान पहले से स्थापित
- Misunderstanding कम होती है
- Mental connection मजबूत रहता है
Love Marriage Ke Nuksaan (Agar Sharai Hadood Na Ho)
- Dating से गुनाह का खतरा
- परिवारों में दूरी
- बिना गवाह, बिना वली गलत निकाह
- Breakup और misuse का डर
- Social pressure
जो लव मैरिज शरीअत के खिलाफ हो —
वह नुकसानदेह और गुनाह का कारण बन सकती है।
Islamic Guidance for Boys & Girls
लड़कों के लिए:
- लड़की को धोखे में न रखें
- शादी का इरादा पक्का रखें
- घरवालों को मनाएं
- लड़की की इज्ज़त करें
लड़कियों के लिए:
- किसी ऐसे इंसान पर भरोसा न करें जिसका इरादा साफ न हो
- घरवालों से छुपकर रिश्ता न रखें
- Zina से दूर रहें
- निकाह को प्राथमिकता दें
Love Marriage vs Arranged Marriage – Islam Ka View
इस्लाम दोनों तरह की शादी को जायज़ मानता है:
| Marriage Type | Islam Ka Hukm |
|---|---|
| Love Marriage | जायज़ (अगर हलाल तरीके से हो) |
| Arranged Marriage | बिल्कुल जायज़ और पसंदीदा |
| Forced Marriage | हराम |
इस्लाम मजबूरी नहीं — रज़ामंदी को देखता है।
Love Marriage Ka Decision Kaise Lein?
- क्या लड़का/लड़की नमाज़ी है?
- क्या दोनों का Akhlaq अच्छा है?
- क्या दोनों परिवार एक-दूसरे को स्वीकार कर सकते हैं?
- क्या लड़के में जिम्मेदारी है?
- क्या लड़की समझदार और शरीफ है?
अल्लाह तआला फरमाता है:
“सबसे अच्छा वह है जिसकी दीन और अख्लाक अच्छे हों।”
Conclusion – Islam & Love Marriage
इस्लाम लव मैरिज से मना नहीं करता।
बल्कि कहता है:
- मोहब्बत हलाल रास्ते से हो
- रिश्ता शरीअत के दायरे में हो
- माता-पिता की इज्ज़त रखी जाए
- निकाह सुन्नत के मुताबिक हो
अगर आप लव मैरिज का इरादा रखते हैं, तो अल्लाह से दुआ करें कि वह आपके लिए बेहतर फैसला करे और दोनों परिवारों के दिलों में मोहब्बत पैदा करे।
इस्लाम का पैग़ाम साफ है —
मोहब्बत हराम नहीं, उसका तरीका हराम या हलाल बनाता है।
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