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Namaz Mein Waswasa Aaye To Kya Kare

Namaz Mein Waswasa Aaye To Kya Kare

Namaz… एक औरत के लिए सिर्फ़ कुछ रकअतें नहीं होतीं। ये वो पल होते हैं जहाँ वो अपने पूरे दिन की थकान, ज़िम्मेदारियाँ, आँसू और उम्मीदें लेकर अल्लाह के सामने खड़ी होती है।

लेकिन अक्सर ऐसा होता है कि जैसे ही हम नमाज़ शुरू करते हैं, दिल भटकने लगता है। कभी बच्चों की आवाज़, कभी रसोई का ख्याल, कभी ये शक कि “रकअत दूसरी थी या तीसरी?”, और कभी अचानक दिल में ये डर — “मेरी नमाज़ कहीं खराब तो नहीं हो गई?”

यही है वसवसा। और यकीन मानिए, इससे ज़्यादा तकलीफ़देह चीज़ नमाज़ में और कुछ नहीं लगती।

Waswasa Kya Hota Hai? (Aur Ye Sirf Aapke Saath Nahi Hota)

वसवसा का मतलब है — दिल में बार-बार शक आना, छोटी बात को बड़ा समझ लेना, और खुद को गुनहगार महसूस करने लगना।

औरतें इस मामले में ज़्यादा परेशान होती हैं, क्योंकि:

  • उनका दिमाग़ एक साथ कई ज़िम्मेदारियाँ संभालता है
  • बच्चे, घर, रिश्ते — सबका बोझ साथ चलता है
  • वो perfection चाहती हैं, खासकर इबादत में

इसलिए जब नमाज़ में ध्यान टूटता है, तो वो खुद को ही दोष देने लगती हैं।

लेकिन एक बात साफ समझ लीजिए: वसवसा आना आपकी कमजोरी नहीं है।

Namaz Mein Waswasa Aaye To Kya Kare

Namaz Mein Waswasa Aaye To Kya Kare Gunah to Nahi Hai

ये बात बहुत कम लोग बताते हैं, लेकिन सच यही है —

वसवसा आना गुनाह नहीं, बल्कि शैतान की चाल है।

शैतान चाहता है कि:

  • आप नमाज़ से डरने लगें
  • बार-बार नमाज़ तोड़ें
  • और सोचें कि “मुझसे सही इबादत होती ही नहीं”

जबकि अल्लाह ऐसा बिल्कुल नहीं चाहता।

अल्लाह दिलों के हाल जानता है। वो जानता है कि एक औरत कितनी कोशिश करके नमाज़ पढ़ रही है।

Ek Aurat Ka Dil Jab Namaz Mein Toot Jata Hai

कभी आपने महसूस किया है — नमाज़ खत्म होते ही आँखों में आँसू आ जाते हैं?

इसलिए नहीं कि अल्लाह से डर लग रहा है, बल्कि इसलिए कि लगता है: “मैं पूरी तरह जुड़ नहीं पाई…”

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बहुत सी औरतें नमाज़ के बाद खुद से कहती हैं:

  • “मेरी नमाज़ अधूरी थी”
  • “मुझसे ठीक से नहीं हुई”
  • “शायद मेरी इबादत क़बूल नहीं हुई”

ये सोच दिल को और भारी कर देती है।

Namaz Shuru Karne Se Pehle Dil Ko Kaise Tayyar Karein

वसवसा कम करने का पहला कदम नमाज़ से पहले का पल होता है।

जैसे ही आप जानमाज़ पर खड़ी हों:

  • जल्दी-जल्दी न करें
  • एक गहरी सांस लें
  • दिल में ये बात लाएँ

“मैं अभी अपने रब के सामने खड़ी होने जा रही हूँ।”

कोई लंबी दुआ ज़रूरी नहीं। बस दिल से इतना कह दें: “या अल्लाह, मेरे दिल को अपनी तरफ़ जमा दे।”

यही छोटी सी तैयारी बहुत बड़ा असर करती है।

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Namaz Ke Beech Waswasa Aaye To Kya Karein?

1. Waswasa Se Ladne Ki Koshish Na Karein

जैसे ही आप सोचती हैं: “मुझे ध्यान नहीं भटकाना चाहिए” उसी पल ध्यान और ज़्यादा भटकता है।

इसलिए:

  • वसवसे को आने दें
  • लेकिन उसे पकड़कर न रखें

आए और जाए — बस।

2. Jo Yaqeen Se Yaad Ho, Usi Par Amal Karein

अगर नमाज़ में शक हो: “2 रकअत थी या 3?”

जो रकअत आपको यकीन से याद हो, उसी को मानिए।

बार-बार नमाज़ तोड़ना और दुबारा शुरू करना वसवसे को और मज़बूत करता है।

3. Dil Ko Baar-Baar Dosh Na Dein

एक औरत सबसे ज़्यादा ज़ुल्म खुद पर ही करती है।

हर नमाज़ के बाद खुद को कटघरे में खड़ा कर देना आपको अल्लाह से नहीं, डर से जोड़ देता है।

अल्लाह डर से नहीं, मोहब्बत से क़रीब होता है।

Waswasa Zyada Ho To Ye Chhoti Adatein Apnayein

  • नमाज़ की जगह एक ही रखें
  • मोबाइल को दूसरे कमरे में रखें
  • वही सूरह पढ़ें जिसका मतलब आप महसूस कर सकें

Allah Perfect Namaz Nahi, Sacchi Koshish Dekhta Hai

अल्लाह आपकी थकान देखता है, आपकी कोशिश देखता है, और आपकी नियत देखता है।

अगर आपकी आँखों में आँसू हैं और दिल में चाह है “या अल्लाह, मैं तेरी बनना चाहती हूँ” तो वही नमाज़ की जान है।

Aakhri Dil Se Nikli Baat

अगर आज नमाज़ में ध्यान भटक गया, तो खुद से ये मत कहिए: “मेरी नमाज़ बेकार हो गई”

बल्कि ये कहिए: “या अल्लाह, मैं फिर भी तेरे सामने खड़ी हुई… यही मेरी जीत है।”

आपकी नमाज़, आपके हाल के साथ क़बूल होती है।

आप अकेली नहीं हैं। आप कमजोर नहीं हैं। आप एक कोशिश करने वाली बंदी हैं।

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और अल्लाह कोशिश करने वालों को कभी खाली नहीं लौटाता। 🌸

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