इस्लाम में क़यामत (Qiyamat) का दिन एक बहुत बड़ी और हक़ीक़ी सच्चाई है। हर मुसलमान इस बात पर ईमान रखता है कि एक दिन यह दुनिया खत्म होगी और हर इंसान को अपने कर्मों का हिसाब देना होगा। क़ुरआन और हदीस में क़यामत आने से पहले कई निशानियाँ बताई गई हैं। इन निशानियों को दो हिस्सों में बाँटा गया है — छोटी निशानियाँ और बड़ी निशानियाँ।
क़यामत की बड़ी निशानियों में से एक है Dabbat-ul-Ard यानी जमीन से निकलने वाला एक अजीब और खास जानवर। बहुत से लोग यह सवाल पूछते हैं:
- क़यामत के करीब कौन सा जानवर निकलेगा?
- दाब्बतुल अर्ज़ क्या है?
- यह जानवर कैसा होगा?
- यह लोगों के साथ क्या करेगा?
इस लेख में हम क़ुरआन और हदीस की रोशनी में Dabbat-ul-Ard की हक़ीक़त को आसान और साफ भाषा में समझेंगे।
Dabbat-ul-Ard क्या है?
इस्लामी मान्यता के अनुसार क़यामत के करीब एक खास जानवर जमीन से निकलेगा, जिसे Dabbat-ul-Ard कहा जाता है।
“दाब्बा” का मतलब है चलने वाला जीव या जानवर
“अर्ज़” का मतलब है जमीन
इस तरह Dabbat-ul-Ard का मतलब है जमीन से निकलने वाला जानवर।
यह कोई साधारण जानवर नहीं होगा बल्कि यह अल्लाह की एक बड़ी निशानी होगी जो लोगों को यह बताएगी कि क़यामत का समय बहुत करीब आ चुका है।
कुरआन में Dabbat-ul-Ard का जिक्र
Dabbat-ul-Ard का जिक्र कुरआन की सूरह अन-नमल में मिलता है।
अल्लाह तआला फरमाता है:
“और जब उन पर बात पूरी हो जाएगी तो हम उनके लिए जमीन से एक जानवर निकालेंगे जो उनसे बात करेगा, क्योंकि लोग हमारी आयतों पर यकीन नहीं करते थे।”
— (सूरह अन-नमल 27:82)
इस आयत से हमें तीन अहम बातें समझ में आती हैं:
- यह जानवर जमीन से निकलेगा
- यह इंसानों से बात करेगा
- यह लोगों को बताएगा कि उन्होंने अल्लाह की निशानियों को नहीं माना
यानी यह जानवर अल्लाह की ताकत की एक बड़ी निशानी होगा।

क़यामत की बड़ी निशानियों में से एक
इस्लाम में क़यामत से पहले कई बड़ी निशानियाँ बताई गई हैं। जब ये निशानियाँ सामने आने लगेंगी तो इसका मतलब होगा कि क़यामत बहुत करीब है।
इन बड़ी निशानियों में शामिल हैं:
- इमाम महदी का आना
- दज्जाल का निकलना
- हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) का उतरना
- याजूज-माजूज का निकलना
- दाब्बतुल अर्ज़ का निकलना
- सूरज का पश्चिम से निकलना
- तीन बड़े भूकंप
- धुआँ (दुखान)
- एक बड़ी आग का निकलना
- लोगों का एक जगह इकट्ठा होना
इन निशानियों में Dabbat-ul-Ard एक बहुत महत्वपूर्ण और हैरान कर देने वाली निशानी है।
Dabbat-ul-Ard कब निकलेगा?
हदीसों से पता चलता है कि यह जानवर क़यामत के बहुत करीब निकलेगा।
उस समय दुनिया में:
- गुनाह बहुत ज्यादा हो चुके होंगे
- लोग अल्लाह की बातों को नजरअंदाज करने लगेंगे
- ईमान बहुत कम रह जाएगा
कुछ इस्लामी विद्वानों के अनुसार यह घटना सूरज के पश्चिम से निकलने के आसपास के समय में हो सकती है।
जब यह निशानी सामने आएगी तो लोगों को समझ आ जाएगा कि क़यामत बहुत करीब है।
Dabbat-ul-Ard लोगों के साथ क्या करेगा?
हदीसों में बताया गया है कि यह जानवर लोगों के साथ कुछ खास काम करेगा।
1. इंसानों से बात करेगा
यह सबसे हैरान करने वाली बात है कि यह जानवर इंसानों से बात करेगा।
यह लोगों से कहेगा कि:
तुम लोगों ने अल्लाह की आयतों पर यकीन नहीं किया।
यह बात लोगों के लिए बहुत बड़ा सबक होगी।
2. ईमान वालों और काफिरों को अलग करेगा
कुछ रिवायतों में बताया गया है कि यह जानवर लोगों के चेहरों पर निशान लगाएगा।
- ईमान वालों के चेहरे चमकदार होंगे
- काफिरों के चेहरे काले होंगे
इससे लोगों की पहचान साफ हो जाएगी कि कौन ईमान वाला है और कौन नहीं।
3. लोगों को सच्चाई दिखाएगा
Dabbat-ul-Ard का मकसद लोगों को सच्चाई दिखाना होगा। लेकिन उस समय तक तौबा का मौका लगभग खत्म हो चुका होगा।
इसलिए यह घटना इंसानों के लिए बहुत बड़ा सबक होगी।
Dabbat-ul-Ard कैसा होगा?
यह सवाल बहुत लोग पूछते हैं कि यह जानवर कैसा होगा।
सच्चाई यह है कि कुरआन और सही हदीस में इसका पूरा रूप नहीं बताया गया।
कुछ इस्लामी विद्वानों ने अलग-अलग राय दी है। कुछ रिवायतों में कहा गया है कि इसका रूप बहुत अजीब होगा और इसमें अलग-अलग जानवरों जैसी विशेषताएँ हो सकती हैं।
लेकिन इसकी असली शक्ल क्या होगी, यह अल्लाह ही बेहतर जानता है।
मुसलमानों के लिए इससे क्या सबक मिलता है?
Dabbat-ul-Ard की निशानी हमें यह याद दिलाती है कि:
- क़यामत जरूर आएगी
- हर इंसान को अपने कर्मों का हिसाब देना होगा
- दुनिया की जिंदगी हमेशा के लिए नहीं है
इसलिए हर मुसलमान को चाहिए कि वह:
- अच्छे काम करे
- अल्लाह को याद रखे
- गुनाहों से बचे
- नमाज़ और इबादत की पाबंदी करे
Conclusion
क़यामत के करीब निकलने वाला जानवर Dabbat-ul-Ard इस्लाम की एक बड़ी और अहम निशानी है। इसका जिक्र कुरआन में साफ तौर पर किया गया है। यह जानवर जमीन से निकलेगा और लोगों से बात करेगा। इसका मकसद लोगों को यह बताना होगा कि उन्होंने अल्लाह की निशानियों को नजरअंदाज किया।
हालांकि इसका पूरा रूप कैसा होगा, यह हमें पूरी तरह मालूम नहीं है। लेकिन मुसलमानों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि हम इन निशानियों से सबक लें और अपनी जिंदगी को बेहतर बनाएं।
क्योंकि आखिर में हर इंसान को अल्लाह के सामने पेश होना है और अपने कर्मों का हिसाब देना है।
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