26 जनवरी आते ही बहुत से मुसलमानों के दिल में एक सवाल पैदा होता है —
“Republic Day manana Islam mein kaisa hai?”
कुछ लोग कहते हैं कि यह ग़लत है,
कुछ कहते हैं कि यह देश का दिन है, इसमें कोई बुराई नहीं।
सच यह है कि ज़्यादातर लोग पूरी बात नहीं जानते।
इस लेख में हम बिना लड़ाई, बिना डर, और बिना किसी पर इल्ज़ाम लगाए
Republic Day और Islam के बारे में सच्चाई समझने की कोशिश करेंगे।
Republic Day आखिर होता क्या है?
Republic Day उस दिन को कहते हैं जब भारत में संविधान लागू हुआ।
इस दिन भारत एक गणराज्य बना।
Republic Day:
- कोई धार्मिक त्योहार नहीं है
- किसी भगवान या पूजा से जुड़ा नहीं है
- यह देश के क़ानून और अधिकारों का दिन है
यहीं से सबसे बड़ी गलतफहमी शुरू होती है।
सबसे बड़ी गलतफहमी क्या है?
बहुत से लोग सोचते हैं:
“Republic Day manana = kisi aur dharm ka festival manana”
यह सोच गलत है।
धार्मिक त्योहार:
- पूजा
- इबादत
- रस्में
Republic Day:
- देश
- संविधान
- नागरिक अधिकार
दोनों अलग-अलग चीज़ें हैं।
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Islam क्या सिखाता है?
Islam कुछ साफ़ बातें सिखाता है:
- इबादत सिर्फ अल्लाह की
- नीयत बहुत अहम है
- इंसाफ़ और अमन
- क़ानून का पालन
अगर कोई काम इबादत नहीं है,
और उसमें शिर्क नहीं है,
तो वह अपने आप में हराम नहीं हो जाता।

क्या Islam देश से मोहब्बत मना करता है?
नहीं।
Islam यह नहीं सिखाता कि:
- देश से नफ़रत करो
- क़ानून तोड़ो
- झगड़ा करो
बल्कि Islam कहता है:
जहाँ रहो, वहाँ अमन से रहो,
जब तक तुम्हारी इबादत रोकी न जाए।
भारत का संविधान:
- नमाज़ से नहीं रोकता
- रोज़ा से नहीं रोकता
- इस्लामी पहचान नहीं छीनता
इसलिए संविधान का सम्मान करना
Islam के खिलाफ़ नहीं है।
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Ulama में राय अलग क्यों है?
आपने देखा होगा कि:
कुछ उलेमा Republic Day को सही कहते हैं,
कुछ एहतियात की बात करते हैं।
इसका कारण यह है:
- कुछ लोग इसे धार्मिक त्योहार समझ लेते हैं
- कुछ लोग इसे सिर्फ राष्ट्रीय दिन मानते हैं
दोनों का मकसद एक ही है —
ईमान की हिफ़ाज़त
“शर्तों के साथ” का मतलब क्या है?
अगर कोई मुसलमान Republic Day पर:
यह करता है:
- देश में अमन की दुआ
- संविधान की अच्छी बातों को समझना
- एक अच्छे नागरिक की तरह सोचना
और यह नहीं करता:
- किसी तरह की पूजा
- धार्मिक नारेबाज़ी
- Islam के उसूलों के खिलाफ़ काम
तो ज़्यादातर विद्वानों के अनुसार
इसमें कोई गुनाह नहीं।
झंडा और राष्ट्रगान को लेकर सच्चाई
झंडा:
- अल्लाह नहीं है
- यह देश का निशान है
राष्ट्रगान:
- दुआ नहीं है
- यह देश से जुड़ा सम्मान है
अगर कोई इन्हें पूजा समझे — ग़लत है
अगर कोई इन्हें नागरिक सम्मान समझे — बात बदल जाती है
Islam में नीयत सबसे अहम है।
सोशल मीडिया की गलती
आजकल सोशल मीडिया पर:
- अधूरी बातें
- डराने वाले पोस्ट
- बिना समझ के फतवे
लोग पढ़ते हैं और डर जाते हैं।
हमें याद रखना चाहिए:
हर वायरल पोस्ट सच्ची नहीं होती।
भारत में मुसलमान की ज़िम्मेदारी
भारत एक बड़ा और अलग-अलग धर्मों वाला देश है।
यहाँ मुसलमान अल्पसंख्यक हैं,
लेकिन संविधान बराबरी देता है।
इसलिए ज़रूरी है कि:
- ईमान भी सुरक्षित रहे
- देश के साथ टकराव भी न हो
Islam हमेशा संतुलन सिखाता है।
तो क्या Republic Day मनाना चाहिए?
इसका जवाब ज़बरदस्ती नहीं है।
सही जवाब यह है:
हर मुसलमान अपनी नीयत और समझ से फ़ैसला करे।
- अगर दिल में शक है → दूर रहना भी ठीक है
- अगर नीयत साफ़ है → शांति से रहना भी ठीक है
Islam ज़बरदस्ती नहीं सिखाता।
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इस दिन मुसलमान क्या अच्छा कर सकते हैं?
- अमन और भाईचारे की बात
- गरीबों की मदद
- बच्चों को सही जानकारी देना
- देश में शांति की दुआ
ये काम हर दिन अच्छे हैं,
और ऐसे दिन पर और भी बेहतर।
असली समस्या कहाँ है?
समस्या Republic Day में नहीं है।
समस्या हमारी अधूरी समझ में है।
जब हम:
- नीयत को भूल जाते हैं
- हर चीज़ को लड़ाई बना देते हैं
- दूसरों पर अपनी राय थोपते हैं
तभी विवाद पैदा होता है।
निष्कर्ष (आख़िरी बात)
Republic Day और Islam को दुश्मन बनाना ज़रूरी नहीं।
Islam अमन, नीयत और इंसाफ़ सिखाता है।
अगर ये तीनों चीज़ें मौजूद हैं,
तो रास्ता खुद निकल आता है।
अल्लाह दिलों का हाल जानता है।
वही सबसे बेहतर फ़ैसला करने वाला है।
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