रिज़्क़ (रोज़ी) इंसान की ज़िंदगी का एक बेहद अहम हिस्सा है। इंसान कोशिश करता है, मेहनत करता है, रोज़गार की तलाश करता है, लेकिन अंतिम फैसला सिर्फ अल्लाह का होता है कि किसको कितना और कैसे दिया जाए। इस्लाम ने इस बात की साफ़ रहनुमाई की है
कि रिज़्क़ सिर्फ मेहनत से नहीं, बल्कि दुआ, नेकअमली और अल्लाह की रहमत से भी बढ़ता है।आज के दौर में जब महंगाई बढ़ रही हो, नौकरी पाना मुश्किल हो, बिज़नेस में नुकसान हो, या घर में तंगी हो—लोग सबसे ज्यादा “Rizq badhane ki dua” सर्च करते हैं।
इसलिए इस लेख में हम आपको रोज़ी बढ़ाने वाली दुआ, उसे पढ़ने का तरीका, वक़्त, इस्लामी अमल, बरकत के तरीके, और तंगी दूर करने का पूरा हल आसान हिंदी में बताएँगे।
रिज़्क़ (Rizq) क्या है? सिर्फ पैसे का नाम नहीं
बहुत से लोग रिज़्क़ को सिर्फ पैसे और कमाई तक सीमित समझते हैं, जबकि इस्लाम के मुताबिक रिज़्क़ एक बहुत बड़ा और व्यापक शब्द है।रिज़्क़ में शामिल हैं:
- आपकी कमाई और नौकरी
- स्वस्थ शरीर
- औलाद
- इज्ज़त
- मोहब्बत और रिश्तों में बरकतवक्त में बरकतसमझ-बूझ
- खाने-पीने की हर नेमत
- यानी जो कुछ भी इंसान के काम आए, वो सब अल्लाह का दिया हुआ रिज़्क़ है।
अल्लाह का वादा: हर इंसान का रिज़्क़ तय है
कुरआन में अल्लाह तआला फरमाता है:“और ज़मीन में कोई जानदार ऐसा नहीं जिसका रिज़्क़ अल्लाह के जिम्मे न हो।”—
सूरह हूद: 6 इस आयत से पता चलता है कि अल्लाह ने हर इंसान की रोज़ी पहले से लिख दी है, लेकिन मेहनत, दुआ और तौबा रिज़्क़ में बरकत और आसानी ला देती है।
Rizq Badhane Ki Dua
नीचे दी गई दुआएँ हदीसों और इस्लामी किताबों में बयान की गई हैं और बेहद असरदार मानी जाती हैं।
1. हलाल और पाक रिज़्क़ की दुआ
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ رِزْقًا طَيِّبًا، وَعِلْمًا نَافِعًا، وَعَمَلًا مُتَقَبَّلًا
हिंदी मतलब:“
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे पाक और हलाल रिज़्क़, फायदा देने वाला इल्म और कबूल होने वाले आमाल का सवाल करता हूँ।”

2. तंगी और क़र्ज़ से निजात की दुआ
اللَّهُمَّ اكْفِنِي بِحَلَالِكَ عَنْ حَرَامِكَ، وَأَغْنِنِي بِفَضْلِكَ عَمَّنْ سِوَاكَ
हिंदी मतलब:“ऐ अल्लाह! अपने हलाल से मुझे हराम से बेनियाज़ कर दे और अपने फज़्ल से मुझे सब लोगों से बेनियाज़ कर दे।”
4. हज़रत मूसा (अ.स) की रिज़्क़ की दुआ (सबसे असरदार)
رَبِّ إِنِّي لِمَا أَنْزَلْتَ إِلَيَّ مِنْ خَيْرٍ فَقِيرٌ
हिंदी मतलब:“
ऐ मेरे रब! तू जो भलाई नाज़िल करे, मैं उसका मोहताज हूँ।”हदीसों में आता है कि हज़रत मूसा (अ.स) ने यह दुआ पढ़ी और अल्लाह ने उनके लिए तुरंत रिज़्क़ और सहूलतों के दरवाज़े खोल दिए।
इन दुआओं को कब और कैसे पढ़ें?
अगर आप इन दुआओं का पूरा फायदा उठाना चाहते हैं, तो यह तरीका अपनाएँ:
1. फ़ज्र की नमाज़ के बाद
– Astaghfirullah 100 बार
2. मगरिब के बाद
– “रब्बी इन्नी…” वाली दुआ 11 बार
3. रात को सोने से पहले
– सूरह वाकिआह की तिलावत(हदीस: “जो इसे रोज़ रात पढ़े, उसे तंगी नहीं आएगी।”)
4. दुश्मनी, बेरोज़गारी या बिज़नेस नुकसान की हालत में
– “اللَّهُمَّ اكْفِنِي بِحَلَالِكَ…” वाली दुआ दिन में तीन बार
5. शुक्रवार के दिन
– दुरूद शरीफ़ 300 बार (बरकत बहुत बढ़ती है)
रिज़्क़ बढ़ाने वाले अमल (100% आज़माए हुए)
इस्लाम में कुछ ऐसे सुन्नती काम बताए गए हैं जिनसे अल्लाह रोज़ी में बरकत देता है।
1. इस्तिग़फ़ार (Astaghfirullah) लगातार पढ़ना
कुरआन में है:“
इस्तिग़फ़ार करो, अल्लाह आसमान से बारिश भेजेगा और माल व औलाद में बढ़ोतरी करेगा।”रोज़ कम से कम 200–300 बार “Astaghfirullah” पढ़ें।
2. माता-पिता की सेवा
हदीस:“
जिसने अपने माँ-बाप की खिदमत की, उसके रिज़्क़ में अल्लाह बरकत देता है।”
3. सुबह का वक्त बरकत वाला है
रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया:“मेरी उम्मत की बरकत सुबह में रखी गई है।”सुबह जल्दी उठने और काम शुरू करने वालों की कमाई में बरकत होती है।
4. हलाल और ईमानदार कमाई
हराम कमाई में कभी बरकत नहीं होती, चाहे कितनी भी हो।हलाल काम में थोड़ा भी हो, लेकिन बरकत रहती है।
5. सदक़ा और खैरात
रसूल ﷺ ने फरमाया:“सदक़ा माल को घटाता नहीं, बल्कि बढ़ाता है।”रोज़ थोड़ा सा भी सदक़ा करें।
क्यों कुछ लोगों की रोज़ी में बरकत नहीं होती?
- इस्लामी तालीम के मुताबिक यह वजहें हो सकती हैं:
- गुनाहों का बढ़ जाना नमाज़ छोड़ना
- घर में लड़ाई-झगड़ा झूठ बोलना
- हराम कमाना शुक्र न करना
- रिश्तेदारों से कटना
- जब इंसान इन चीज़ों से दूर हो जाए, अल्लाह उसके लिए रिज़्क़ के नए रास्ते खोल देता है।
7 दिनों का “रिज़्क़ बढ़ाने का अमल” (बहुत असरदार)
दिन 1 से 7 तक रोज़:
फज्र के बाद: 100 दफा Astaghfirullah
धंधे/काम शुरू करने से पहले: 11 बार “रब्बी इन्नी…”
.मगरिब के बाद: कोई भी एक दुआ 33 बार
रात: सूरह वाकिआह
दिन में: थोड़ी सी सदक़ा (₹1 भी चलेगा)
गुनाहों से दूर रहना
इंशा-अल्लाह बहुत जल्द रिज़्क़ में तौसी (विस्तार) नज़र आएगी।
नतीजा (Conclusion)
रिज़्क़ बढ़ाना सिर्फ दुनिया की कोशिश का खेल नहीं है, बल्कि यह अल्लाह की रहमत का नतीजा है। जो इंसान दुआ करता है, नमाज़ की पाबंदी करता है, हलाल कमाई अपनाता है और गुनाहों से बचता है—उसकी रोज़ी में अल्लाह अवश्य बरकत देता है।
इस लेख में दी गई दुआएँ, अमल और सुन्नती तरीके अगर आप नियमित करें, तो इंशा-अल्लाह आपके रिज़्क़ में बढ़ोतरी, सहूलत और बरकत नज़र आएगी।
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