रोज़ा इस्लाम की सबसे अहम इबादतों में से एक है। रोज़ा केवल भूखा और प्यासा रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह इंसान को सब्र, तक़वा, नेकी और आत्म-संयम सिखाता है। रमज़ान का महीना अल्लाह की खास रहमतों वाला महीना होता है, जिसमें हर नेक काम का सवाब कई गुना बढ़ा दिया जाता है। ऐसे में यह जानना बहुत ज़रूरी हो जाता है कि रोज़ा सही तरीके से कैसे रखा जाता है।
इस आर्टिकल में हम रोज़ा रखने से जुड़ी हर छोटी-बड़ी बात को आसान हिंदी में समझेंगे, ताकि नया रोज़ा रखने वाला भी बिना किसी परेशानी के सही ढंग से रोज़ा रख सके।
Roza Kya Hota Hai?
रोज़ा का मतलब है:
- सुबह फज्र से पहले सहर करने के बाद
- सूरज डूबने तक
- खाने-पीने और हर गलत काम से खुद को रोकना
रोज़ा सिर्फ जिस्म का नहीं बल्कि दिल और दिमाग का भी रोज़ा होता है। अगर कोई व्यक्ति भूखा तो रहे लेकिन झूठ बोले, गाली दे या बुरी नज़र रखे, तो रोज़े का असली मकसद पूरा नहीं होता।
Roza Kis Par Farz Hai?
रोज़ा उन लोगों पर फर्ज़ है जो:
- मुसलमान हों
- बालिग (समझदार उम्र) हों
- अक्लमंद हों
- सेहतमंद हों
- सफर में न हों
किन लोगों को रोज़े से छूट मिलती है?
- बहुत ज़्यादा बीमार व्यक्ति
- बहुत बुज़ुर्ग जिनमें रोज़ा रखने की ताक़त न हो
- गर्भवती महिला
- दूध पिलाने वाली माँ
- सफर में रहने वाला व्यक्ति
ऐसे लोग बाद में क़ज़ा रोज़ा रख सकते हैं या फिदया दे सकते हैं।
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Roza Rakhne Se Pehle Kya Karna Chahiye?
रोज़ा रखने से पहले इंसान को:
- अपने गुनाहों से तौबा करनी चाहिए
- दिल में साफ नीयत करनी चाहिए
- दूसरों के हक़ मारकर रोज़ा नहीं रखना चाहिए
क्योंकि रोज़ा अल्लाह को खुश करने के लिए रखा जाता है, दिखावे के लिए नहीं।
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Roza Rakhne Ka Sahi Tarika (Step By Step)
1. Sehri Karna Kyun Zaroori Hai?
सहर करना सुन्नत है। सहर में उठकर खाना खाने से:
- पूरे दिन ताक़त बनी रहती है
- रोज़ा आसानी से पूरा होता है
- अल्लाह की बरकत मिलती है
सहर में हल्का लेकिन ताक़त वाला खाना खाना चाहिए जैसे:
- रोटी
- दाल
- अंडा
- फल
- पानी ज़रूर पिएं
2. Roze Ki Niyat Kaise Karen?
रोज़ा रखने के लिए नीयत करना जरूरी है। नीयत दिल से होती है, ज़ुबान से कहना जरूरी नहीं।
Roze Ki Niyat (Hindi):
“मैं अल्लाह के लिए रमज़ान के महीने का रोज़ा रखने की नीयत करता/करती हूँ।”
3. Roze Ki Halat Mein Kin Cheezon Se Bachna Chahiye?
रोज़े की हालत में इन चीज़ों से बचना बहुत ज़रूरी है:
- खाना-पीना
- सिगरेट, गुटखा
- झूठ बोलना
- चुगली करना
- गाली देना
- गुस्सा करना
- गलत नज़र डालना
अगर इंसान इनसे नहीं बचता तो रोज़ा सिर्फ भूख बनकर रह जाता है।
4. Roze Mein Ibadat Ka Kya Maqsad Hai?
रोज़ा अल्लाह की इबादत के लिए होता है, इसलिए:
- पांचों वक्त की नमाज़ पढ़ें
- कुरआन की तिलावत करें
- दरूद शरीफ पढ़ें
- गरीबों की मदद करें
- ज्यादा से ज्यादा दुआ करें
रोज़ेदार की दुआ अल्लाह जरूर कुबूल करता है।
5. Iftar Ka Sahi Tarika
सूरज डूबते ही रोज़ा खोलना चाहिए। देर करना ठीक नहीं है।
इफ्तार में:
- खजूर
- पानी
से रोज़ा खोलना सुन्नत है।
Iftar Ki Dua (Hindi):
“ऐ अल्लाह! मैंने तेरे लिए रोज़ा रखा, तुझ पर ईमान लाया और तेरे दिए हुए रिज़्क से रोज़ा खोला।”
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Roza Kin Cheezon Se Toot Jata Hai?
रोज़ा टूट जाता है अगर:
- जानबूझकर खाना-पीना
- जानबूझकर रोज़ा तोड़ना
- सिगरेट पीना
ऐसे में:
- एक रोज़े की क़ज़ा
- और कुछ मामलों में कफ़्फ़ारा भी देना पड़ता है
अगर भूल से कुछ खा लिया तो रोज़ा नहीं टूटता।
Roze Ke Fayde (Roza Rakhne Ke Benefits)
1. Deeni Fayde
- गुनाहों की माफी
- अल्लाह की क़ुर्बत
- सब्र की आदत
2. Duniyaavi Fayde
- शरीर की सफाई
- पाचन तंत्र बेहतर
- आत्म-नियंत्रण
Roza Sirf Bhookh Ka Naam Nahi
अगर कोई इंसान रोज़ा रखकर भी:
- झूठ बोलता है
- दूसरों को तकलीफ देता है
तो ऐसे रोज़े का पूरा सवाब नहीं मिलता। रोज़ा इंसान को अंदर से बदलने के लिए होता है।
Nateeja (Conclusion)
रोज़ा इंसान को बेहतर इंसान बनाता है। अगर रोज़ा सही नीयत, सही तरीके और सच्चे दिल से रखा जाए, तो यह न सिर्फ आख़िरत बल्कि दुनिया में भी इंसान की ज़िंदगी को बेहतर बना देता है।
अल्लाह हम सभी को सही तरीके से रोज़ा रखने की तौफीक अता फरमाए। आमीन।
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