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Roze Me Injection Ya Drip Lagwana Jaiz Hai Ya Nahi

Roze Me Injection Ya Drip Lagwana Jaiz Hai Ya Nahi? Puri Islamic Dalil Ke Sath

भूमिका (Introduction)

रमज़ान सिर्फ एक महीना नहीं, बल्कि ईमान की ताज़गी और अल्लाह से नज़दीकी का मौका होता है। रोज़ेदार इस महीने में हर छोटे-बड़े अमल को सोच-समझकर करता है, ताकि उसका रोज़ा कहीं से भी खराब न हो जाए। लेकिन जब बात सेहत की आती है, तो कई बार इंसान मजबूर हो जाता है।

आज के समय में डॉक्टर द्वारा इंजेक्शन या ड्रिप लगवाना बहुत आम हो गया है। ऐसे में रोज़ेदार के दिल में एक ही सवाल घूमता रहता है:

“क्या रोज़े की हालत में इंजेक्शन या ड्रिप लगवाने से रोज़ा टूट जाता है?”

यह सवाल सिर्फ जानकारी का नहीं, बल्कि ईमान और डर-ए-ख़ुदा से जुड़ा हुआ है। इसी वजह से इस लेख में हम इस मसले को पूरी गंभीरता, इस्लामी दलीलों और आसान भाषा में समझेंगे।


रोज़ा क्या है और क्यों रखा जाता है?

इस्लाम में रोज़ा केवल भूखा-प्यासा रहने का नाम नहीं है। रोज़ा इंसान को यह सिखाता है कि वह अपनी इच्छाओं पर काबू रखे और अल्लाह के हुक्म को हर चीज़ पर तरजीह दे।

रोज़ा का मतलब:

  • सुबह सादिक़ से सूरज डूबने तक
  • खाने, पीने और शहवत से रुक जाना
  • सिर्फ अल्लाह की रज़ा के लिए

रोज़ा इंसान के दिल को नरम करता है, गुनाहों से बचाता है और गरीबों का दर्द महसूस कराता है।


रोज़ा टूटने की बुनियादी शर्तें

इस्लामी विद्वानों (फुक़हा) ने रोज़ा टूटने के कुछ उसूल बताए हैं। उनके अनुसार रोज़ा उस समय टूटता है जब:

  • कोई चीज़ जानबूझकर
  • कुदरती रास्ते (मुंह या नाक) से
  • पेट या दिमाग तक पहुंचे
  • और वह चीज़ घिज़ा या ताक़त का काम करे

यहीं से इंजेक्शन और ड्रिप का मसला पैदा होता है, क्योंकि यह मुंह से नहीं, बल्कि नस या मांस के ज़रिये दिया जाता है।

Roze Me Injection Ya Drip Lagwana Jaiz Hai Ya Nahi

इंजेक्शन और ड्रिप को लेकर उलझन क्यों है?

कई लोग सोचते हैं:

  • इंजेक्शन सुई से लगता है
  • ड्रिप नस के ज़रिये जाती है

तो क्या यह खाने-पीने जैसा माना जाएगा?

इसी कन्फ्यूजन को दूर करने के लिए उलेमा ने इंजेक्शन को उसकी क़िस्म और मकसद के हिसाब से बांटा है।

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इंजेक्शन के प्रकार और उनका हुक्म

1️⃣ इलाज या बीमारी का इंजेक्शन

इसमें शामिल हैं:

  • बुखार के इंजेक्शन
  • दर्द कम करने वाले इंजेक्शन
  • एंटीबायोटिक
  • एलर्जी, इन्फेक्शन या सूजन के इंजेक्शन

इन इंजेक्शन का मकसद:

  • बीमारी का इलाज
  • दर्द या तकलीफ को कम करना

➡️ इनमें कोई घिज़ा या पोषण नहीं होता।

हुक्म:
➡️ ऐसे इंजेक्शन से रोज़ा नहीं टूटता।
➡️ ज़्यादातर उलेमा इस पर सहमत हैं।


2️⃣ विटामिन और ताक़त देने वाले इंजेक्शन

जैसे:

  • Vitamin B12
  • Multivitamin injection

इनका मकसद:

  • शरीर को ताक़त देना
  • कमजोरी दूर करना

हुक्म:
इस पर उलेमा के बीच मतभेद है।

  • कुछ कहते हैं:
    → रोज़ा नहीं टूटता, क्योंकि यह खाने-पीने के रास्ते से नहीं जाता
  • कुछ कहते हैं:
    → यह शरीर को ताक़त देता है, इसलिए रोज़े की रूह के खिलाफ है

➡️ बेहतर और एहतियात वाला रास्ता यह है कि ऐसे इंजेक्शन इफ़्तार के बाद लगवाए जाएँ।


3️⃣ ग्लूकोज़, सलाइन और न्यूट्रिशन ड्रिप

यह सबसे ज़्यादा अहम और संवेदनशील मामला है।

ड्रिप का काम:

  • शरीर को घिज़ा देना
  • भूख और कमजोरी खत्म करना
  • खाना-पीना का विकल्प बनना

हुक्म:
➡️ ज़्यादातर उलेमा के अनुसार इससे रोज़ा टूट जाता है।

क्योंकि:

  • यह सीधे शरीर को पोषण देता है
  • यह रोज़े के मकसद के खिलाफ है

हनफ़ी फ़िक़्ह के अनुसार साफ़ फैसला

हनफ़ी फ़िक़्ह के मुताबिक:

  • ❌ जो चीज़ घिज़ा का काम करे → रोज़ा टूट जाएगा
  • ✅ जो सिर्फ दवा हो → रोज़ा नहीं टूटेगा

इसी उसूल पर:

  • बीमारी का इंजेक्शन → जायज़
  • ग्लूकोज़ या न्यूट्रिशन ड्रिप → रोज़ा तोड़ देगी

मजबूरी, बीमारी और इस्लाम की आसानी

इस्लाम सख्ती नहीं, बल्कि रहमत का दीन है।

अगर:

  • बीमारी गंभीर हो
  • डॉक्टर ड्रिप या इंजेक्शन ज़रूरी बताए
  • रोज़ा रखने से जान को खतरा हो

➡️ तो रोज़ा तोड़ना गुनाह नहीं है।

बाद में क्या करना होगा?

  • जब सेहत ठीक हो जाए → सिर्फ क़ज़ा रोज़ा
  • कोई गुनाह नहीं
  • कोई फिद्या नहीं (अगर बीमारी अस्थायी हो)

आम गलतफहमियाँ जो दूर होनी चाहिए

❌ इंजेक्शन सुई से लगता है, इसलिए रोज़ा टूट जाएगा
❌ हर ड्रिप से रोज़ा नहीं टूटता
❌ बीमारी में रोज़ा तोड़ना गुनाह है

➡️ ये सब गलत सोच है।
इस्लाम इंसान की मजबूरी को समझता है।


रोज़ेदारों के लिए ज़रूरी नसीहत

  • बिना ज़रूरत इंजेक्शन न लगवाएँ
  • शक की हालत में उलेमा से पूछें
  • सेहत अल्लाह की अमानत है
  • रोज़ा इबादत है, सज़ा नहीं

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आसान शब्दों में जवाब

रोज़े की हालत में इलाज के लिए इंजेक्शन लगवाना जायज़ है और इससे रोज़ा नहीं टूटता, लेकिन ग्लूकोज़ या पोषण वाली ड्रिप से रोज़ा टूट जाता है।


निष्कर्ष (Conclusion)

रोज़ा अल्लाह की एक अज़ीम इबादत है, लेकिन इस्लाम इंसान को तकलीफ में डालना नहीं चाहता। अगर इंजेक्शन सिर्फ इलाज के लिए है, तो रोज़ा सुरक्षित है। लेकिन अगर ड्रिप या इंजेक्शन शरीर को खाने-पीने जैसी ताक़त देता है, तो रोज़ा टूट जाता है और बाद में उसकी क़ज़ा करनी होगी।

अल्लाह तआला हमें सही समझ, सही अमल और सही नीयत की तौफ़ीक़ अता फरमाए। आमीन।

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