एक मुस्लिम औरत की ज़िंदगी बाहर से जितनी सुकून वाली दिखती है, अंदर से उतनी ही ज़िम्मेदारियों से भरी होती है।
सुबह आंख खुलते ही घर, बच्चे, नमाज़, काम, और फिर पूरा दिन किसी न किसी फ़िक्र में निकल जाता है।
शाम होते-होते जिस्म थक जाता है और दिल बस थोड़ा सुकून चाहता है।
इसी भाग-दौड़ में अक्सर सुबह–शाम की दुआ या तो भूल जाती है या फिर सिर्फ़ आदत की तरह पढ़ ली जाती है।
जबकि हक़ीक़त ये है कि यही एक छोटी सी दुआ पूरे दिन की हिफ़ाज़त, बरकत और सुकून की वजह बन सकती है।
यह पोस्ट ख़ास तौर पर मुस्लिम औरतों के लिए है — आसान भाषा में, बिना भारी इल्म के, बिल्कुल दिल से।
Subah Sham Ki Dua Kya Hai
सुबह–शाम की दुआ उस दुआ को कहा जाता है जिसे इंसान दिन की शुरुआत में और दिन के ख़त्म होते वक़्त पढ़ता है।
इस दुआ का मक़सद अल्लाह से ये दुआ करना होता है कि:
- वह हमें हर तरह के नुकसान से बचाए
- हमारे घर, बच्चों और रोज़ी में बरकत दे
- और जो दिखता या नहीं दिखता, हर बुराई से हिफ़ाज़त करे
नबी ﷺ खुद इस दुआ को पाबंदी से पढ़ते थे और सहाबा को भी इसकी तालीम देते थे।
Muslim Aurat Ki Zindagi Aur Is Dua Ki Zarurat
एक औरत अक्सर अपने लिए सबसे आख़िर में सोचती है।
वह बच्चों के लिए, शौहर के लिए, घर के लिए तो फ़िक्र करती है —
लेकिन अपने दिल और अपनी हिफ़ाज़त के लिए नहीं।
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बहुत सी औरतें कहती हैं:
- “वक़्त नहीं मिलता”
- “बच्चे परेशान कर रहे थे”
- “काम में भूल गई”
लेकिन सच्चाई ये है कि:
अगर दिल में आदत बन जाए, तो वक़्त खुद निकल आता है।
ये दुआ औरत को याद दिलाती है कि:
“मैं अकेली नहीं हूँ, अल्लाह मेरे साथ है।”
Subah Sham Ki Dua Kab Aur Kaise Padhein
Subah:
- फ़ज्र के बाद
- या सूरज निकलने से पहले
Sham:
- असर के बाद
- या सूरज ढलने के बाद
दुआ पढ़ते वक़्त:
- ज़रूरी नहीं कि बहुत लंबी हो
- ज़रूरी ये है कि दिल मौजूद हो
अगर बच्चे पास हों, काम चल रहा हो — तब भी दुआ पढ़ी जा सकती है।
अल्लाह नीयत देखता है, परफेक्शन नहीं।

Subah Sham Ki Dua Arabic Mein
بِسْمِ اللَّهِ الَّذِي لَا يَضُرُّ مَعَ اسْمِهِ شَيْءٌ فِي الْأَرْضِ وَلَا فِي السَّمَاءِ وَهُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ
Subah Sham Ki Dua Ka Hindi Matlab
अल्लाह के नाम से (मैं पढ़ती हूँ)
जिसके नाम के साथ ज़मीन और आसमान में कोई भी चीज़ नुकसान नहीं पहुँचा सकती,
और वही सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
Is Dua Ki Fazilat Aur Barkat
इस दुआ के बारे में हदीस में आता है कि:
- जो इंसान इसे सुबह और शाम पढ़े
- अल्लाह उसे हर तरह के अचानक आने वाले नुकसान से बचाता है
मुस्लिम औरतों के लिए इसकी बरकत खास तौर पर इन रूपों में दिखती है:
- घर में सुकून
- दिल की बेचैनी में कमी
- बच्चों की हिफ़ाज़त का एहसास
- बेवजह के डर से राहत
यह कोई जादू नहीं, बल्कि अल्लाह पर भरोसे का असर है।
Aksar Auratein Yahan Galti Kar Deti Hain
बहुत सी औरतें ये गलतियाँ करती हैं:
- सिर्फ़ ज़ुबान से पढ़ लेना, दिल शामिल न करना
- लगातार कुछ दिन पढ़कर छोड़ देना
- ये सोचना कि “आज नहीं पढ़ी तो क्या हो जाएगा”
- बच्चों या काम की वजह से बिल्कुल छोड़ देना
याद रखिए:
अल्लाह आपसे बोझ नहीं चाहता,
वह सिर्फ़ एक छोटा सा रिश्ता चाहता है।
Busy Life Mein Is Dua Ko Kaise Aadat Banayein
- फ़ज्र के बाद चाय बनाते वक़्त पढ़ लें
- बच्चों को स्कूल भेजते वक़्त दिल में पढ़ लें
- शाम को मग़रिब से पहले एक मिनट निकाल लें
- मोबाइल में रिमाइंडर लगा लें
धीरे–धीरे ये दुआ रूटीन नहीं, ज़रूरत बन जाएगी।
Auraton Ke Liye Ek Dil Se Nasihat
अगर आप:
- अक्सर थकी रहती हैं
- जल्दी रो पड़ती हैं
- दिल भारी महसूस होता है
तो समझ लीजिए कि आपका दिल अल्लाह को याद करना चाहता है।
सुबह–शाम की दुआ:
- औरत को मजबूत बनाती है
- उसे याद दिलाती है कि वह सिर्फ़ ज़िम्मेदार नहीं, अल्लाह की अमानत भी है
Rozana Amal Ka Asaan Tarika
- सुबह 3 बार दुआ
- शाम 3 बार दुआ
- एक बार दिल से मतलब समझकर
बस इतना काफ़ी है।
Aakhri Baat (Dil Se)
ये दुआ कोई भारी इल्म नहीं,
कोई मुश्किल अमल नहीं,
और न ही सिर्फ़ बुज़ुर्गों के लिए है।
ये हर उस मुस्लिम औरत के लिए है
जो चाहती है कि:
- उसका घर महफ़ूज़ रहे
- उसका दिल सुकून में रहे
- और उसका रिश्ता अल्लाह से जुड़ा रहे
आज से सिर्फ़ एक इरादा कर लीजिए —
सुबह और शाम, इस दुआ के साथ।
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